रिसर्च में बताया है कि जो लोग शारीरिक श्रम नहीं करते हैं या बेहद कम करते हैं, उनमें कोरोना का संक्रमण घातक साबित हो सकता है. ऐसे लोगों को संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है. लेकिन इस संक्रमण में एक बात नोटिस करने वाली ये रही कि गांवों में या शहर के निम्न वर्गीय तबके पर इस महामारी का असर गंभीर असर नहीं पड़ा है जो की काफी सत्य है की लगभग ऐसा ही देखा जा रहा है। अमेरिका की कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कोरोना पर की अपनी एक रिसर्च में बताया है कि जो लोग शारीरिक श्रम नहीं करते हैं उनमें कोरोना का संक्रमण घातक साबित हो सकता है. ऐसे लोगों को संक्रमित होने पर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है. साथ ही ऐसे मरीजों में मौतों का आंकड़ा भी ज्यादा रहा. वहीं शारीरिक श्रम करने वाले लोग अगर संक्रमित हो भी गए तो कोरोना उन्हें ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पाता है. गांव के लोगो का पाचन सकती सेहर के लोगो के मुकाबले अच्छा होता है ककी वह के लोग फ़ास्ट फ़ूड से ज्यादा पोस्टिक अनाज में ध्यान देते है।



