
अब आया नया फंडा, नगर निगम के आदेश पर हाइकोर्ट बरसा का डंडा
RANCHI-झारखंड उच्च न्यायालय ने रांची के अपर बाजार के दुकानदारों को बड़ी ख़ुशख़बरी, झारखंड हाईकोर्ट ने अपर बाजार की दुकानों को तत्काल तोड़ने पर रोक लगा दी है. हालांकि, यह रोक तभी तक के लिये है जब तक उचित फोरम में अपील व्यवस्था नहीं हो जाती है.
क्या है पूरा मामला?
अदालत ने रांची एसएसपी को अपर बाजार की यातायात व्यवस्था को सुविधाजनक बनाते हुए पार्किंग ज़ोन और नो पार्किंग ज़ोन बनाने का निर्देश दिया था. जिसके बाद रांची नगर निगम ने अपर बाजार में दुकानों को तोड़ने का नोटिस जारी किया था. जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी. इसी मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत यह टिप्पणी की है. सुनवाई करते हुए अदालत ने मौखिक टिप्पणी की कि हम सिर्फ झारखंड की भलाई सोच रहे हैं, नगर निगम कानून सम्मत कार्रवाई करे. कोर्ट ने कहा कि नैसर्गिक न्याय का ख्याल रखना जरूरी है. यदि किसी का घर तोड़ने की स्थिति आती है तो सभी तथ्यों की गहनता से जांच करें.
झारखंड चैंबर की जनहित याचिका पर कोर्ट की टिप्पिणि :
जनहित याचिका चैंबर की ओर दाखिल की गई थी. चैंबर की ओर वरीय अधिवक्ता अनिल सिन्हा ने पैरवी करते हुए कोर्ट को बताया कि निगम की कार्रवाई नियमों के खिलाफ की जा रही है. निगम हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर भवनों और घरों को तोड़ने का नोटिस दे रहा है. अदालत ने इस बात पर नाराजगी भी जताई. निगम के अधिवक्ता एल सी ए शाहदेव से पूछा कि क्या अदालत ने भवन को तोड़ने का आदेश दिया है ? निगम हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देकर नोटिस क्यों भेज रहा है ?जिसपर नगर विकास विभाग के सचिव ने अदालत को आश्वस्त कराया कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा. अदालत ने रांची के एसएसपी से पूछा, अपर बाजार में क्यों नहीं ट्रैफिक नियंत्रित हो रहा है. एसएसपी ने बताया कि अपर बाज़ार में ट्रैफिक कंट्रोल करने के उपाय किये जा रहे हैं. इस जनहित याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति डॉ. रवि रंजन और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई हुई.



