दिल्रांली / रांची: लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पास नहीं हो सका क्योंकि इसे दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी। बिल के पक्ष में 326 वोट चाहिए थे, लेकिन केवल 298 वोट ही मिल पाए, जिससे यह प्रस्ताव गिर गया। इस बिल पर झामुमो विधायक कल्पना सोरेन ने भी प्रतिक्रिया दी है,”राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात हम पहले से करते आए हैं, और आज भी पूरे मजबूती से इसके पक्ष में खड़े हैं। लोकसभा हो या विधानसभा महिलाओं को उनका हक मिलना ही चाहिए।लेकिन मैं केंद्र सरकार से सीधा सवाल पूछना चाहती हूँ कि क्या देश को चलाने के लिए अब डेटा की ज़रूरत नहीं रह गई है?आप लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने की बात कर रहे हैं, आप परिसीमन की बात कर रहे हैं, आप महिलाओं को आरक्षण देने की बात कर रहे हैं, लेकिन बिना जनगणना, बिना वास्तविक आंकड़ों के, यह कैसी जल्दबाजी है?यह सिर्फ एक नीति नहीं है, यह देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बदलने का फैसला है। और ऐसे फैसले भावनाओं से नहीं, तथ्यों और आंकड़ों से लिए जाने चाहिए।”




