बांदा जिला पंचायत सदस्य और भाजपा नेता श्वेता सिंह गौर की मौत के मामले में उनकी बेटियों ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. बेटियों ने मीडिया के सामने कई ऐसी बातें बताई हैं जो इशारा करती हैं कि श्वेता की हत्या की गई है और वह भी बेटे की चाहत में। श्वेता के ससुराल वाले चाहते थे कि उनके पति दीपक दोबारा शादी करें ताकि परिवार को वारिस मिले। इतना ही नहीं बेटियों ने यह भी दावा किया कि उनके पिता ने कई बार उनकी मां को मारने की बात कही थी.
भाजपा नेता श्वेता सिंह गौर की मौत के मामले में उनके सेवानिवृत्त डीआईजी ससुर, भाजपा नेता पति व सास व साले के खिलाफ हत्या व दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया गया है. बेटी ने बताया है कि जिस दिन उसकी मां श्वेता की मौत हुई थी, स्कूल जाते समय पिता दीपक ने उसे बहुत बड़ी बात बताई थी. आगे जानिए क्या है वो बात और क्या हैं बेटियों ने अपने घरवालों पर लगाए आरोप.
बेटी बोली- पापा ने लखनऊ में भी कहा था, तुम्हारी मां को मार दूंगा:
बेटी ने गुरुवार को मौजूद मीडिया के सामने बताया कि, कल (बुधवार) मैं स्कूल जा रही थी, तब पिता ने मुझसे कहा कि जब तुम स्कूल से वापस आओगी तो तुम्हारी मां मर जाएगी. लखनऊ में भी वे कह रहे थे कि मैं बांदा जाऊंगा और तुम्हारी मां को मार दूंगा।
सोशल मीडिया से भी संकेत मिल रहे थे:
राजनीति में आने के बाद मुखर हुईं श्वेता सिंह गौर की शादीशुदा जिंदगी में क्या चल रहा था, यह सोशल मीडिया पर परोसे जा रहे मैसेज सिग्नल से साफ नजर आता है। घर में पति-पत्नी के बीच आमने-सामने तकरार हो गई, साथ ही सोशल मीडिया पर इशारों-इशारों में एक-दूसरे पर कटाक्ष या शब्द भी चल रहे थे। श्वेता द्वारा सोशल मीडिया पर रोजाना किए जाने वाले पोस्ट इस बात के गवाह हैं।
पति की सियासी चाहतों ने तबाह किया परिवार:
डेढ़ दशक पहले दीपक और श्वेता ने शादी के बंधन में बंध गए थे। प्रारंभिक जीवन सुंदर था। दोनों की तीन बेटियां हैं। एक खुशहाल और भरा-पूरा परिवार था। लेकिन पति दीपक की राजनीतिक ख्वाहिशों ने श्वेता को राजनीति की राह पर ला खड़ा किया। यहीं से सुखी परिवार में कलह शुरू हुई। जो बढ़ता गया और श्वेता की मौत तक चला गया।
हाल ही में श्वेता द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए पोस्ट साफ इशारा कर रहे हैं कि उनकी घरेलू जिंदगी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। पोस्ट के कुछ लेखों के उदाहरणों पर एक नज़र डालें- ‘धैर्य की भी सीमा होती है, अगर हद से ज्यादा हो जाए तो इसे कायरता कहते हैं। एक अन्य पोस्ट में श्वेता ने लिखा था- आजाद होने का मतलब है कि एक महिला अपनी मर्जी से जी सकती है, इसका मतलब पुरुषों से प्रतिस्पर्धा करना नहीं है। बल्कि अपनी क्षमताओं और व्यक्तित्व को समझना है। अंदर से टूट चुकी श्वेता हमेशा मुस्कुराती रहती थी। पोस्ट में लिखा- दिल में जद्दोजहद और फिर भी मुस्कुराता चेहरा, यही है जिंदगी की बेहतरीन एक्टिंग.



