Homeदेशउत्तराखंड के हल्द्वानी में ऐसा सांप देखा गया जिसने सबको चौंका दिया

उत्तराखंड के हल्द्वानी में ऐसा सांप देखा गया जिसने सबको चौंका दिया

saap– यह बेहद दुर्लभ किस्म का सांप (Rare snake) है। यह लाल रंग (Red Snake) का दिखता है
– यह दुर्लभ लाल सांप बिंदुखत्ता (Bindutta) इलाके के खुरियाखत्ता ( Khuriyakhata ) में रहने वाले रविंद्र सिंह कोरंगा (Ravindra Singh Koranga) के घर की बाउंड्री में रेंगते हुए देखा

नई दिल्ली. जहीरीले सांपों (Poisonous Snakes) से कौन नहीं डरता। एक जानकारी के मुताबिक हमारे देश में सालाना 46 हजार से ज्यादा लोगों की मौत सांप डंसने (Death Due To Snake Bite) से होती है। ऐसा मरने वालों में अधिकतर ग्रामीण किसान (Farmer) और मजदूर होते हैं। इस बीच उत्तराखंड (Uttarakhand) के हल्द्वानी (Haldwani) में एेसा सांप देखा गया जिसने सबको चौंका दिया। यह बेहद दुर्लभ किस्म का सांप (Rare Snake) है। यह लाल रंग (Red Snake) का दिखता है।

घर की बाउंड्री में दिखा सांप

यह दुर्लभ लाल सांप बिंदुखत्ता (Bindutta) इलाके के खुरियाखत्ता ( Khuriyakhata ) में रहने वाले रविंद्र सिंह कोरंगा (Ravindra Singh Koranga) के घर की बाउंड्री में रेंगते हुए देखा। अजीब से रंग के दिखने वाले इस सांप को देख लोग घबरा गए। कोरंगा परिवार ने वन विभाग की टीम को इसकी सूचना दी।

सांप को नुकसान न पहुंचाने की दी हिदायत

रविंद्र ने फॉरेस्ट के गौला रेंज के रेंजर आरपी जोशी (RP Joshi) को बताया कि घर में लाल रंग का सांप घुस आया है, जिस पर आरपी जोशी ने अनुमान लगाया कि ये दुर्लभ किस्म की प्रजाति का सांप हो सकता है। रेंजर ने कर्मचारी भेजने के आश्वासन के साथ ही सांप को नुकसान न पहुंचाने की हिदायत दी।

किया गया रेस्क्यू

जिसके बाद वन विभाग के स्नेक कैचर यानी सांप पकड़ने के विशेषज्ञ कर्मचारी मौके पर पहुंचे और सांप को रेस्क्यू कर लिया गया। स्नेक कैचर हरीश ने बताया कि उनके लिए भी ये सांप बिल्कुल नया था।

लाल मूंगा खुखरी है नाम

हल्द्वानी के डीएफओ कुंदन कुमार के मुताबिक, बिंदुखत्ता में रविंद्र सिंह कोरंगा के घर से पकड़ा गया सांप बिल्कुल दुर्लभ किस्म का है, जिसे बोलचाल की भाषा में लोग लाल मूंगा खुखरी सांप यानी रेड कोरल कुकरी स्नेक (जूलॉजिकल नाम ओलिगोडोन खेरिएन्सिस ) कहा जाता है। डीएफओ कुंदन कुमार के मुताबिक, ये सांप जहरीला नहीं होता। इस सांप को वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 में शेड्यूल- 4 का दर्जा प्राप्त है।

2014 में देखा गया था पहली बार

बता दें कि इससे पहले इस प्रजाती के सांप को साल 2014 में खटीमा में देखा गया था। इसे खटीमा के सुरई रेंज में देखा गया था। जानकारी के मुताबिक, साल 2014 से पहले ये सांप एक बार उत्तर-प्रदेश और एक बार पूर्वोत्तर के राज्य असम में देखा गया था।

जानिए सांप की खासियत

इस सांप की खासियत यह है कि ये दीमक के टीलों में रहता है और अन्य सांपों और छिपकलियों के अंडे खाता है। दिखने में ये एकदम लाल यानी इसमें मूंगे के पत्थर की तरह चमक होती है।

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