दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट (स्पेशल जज विशाल गोगने) ने 16 दिसंबर 2025 को एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) की ओर से दाखिल की गई PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) के तहत प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट (चार्जशीट) पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह कंप्लेंट मेंटेनेबल नहीं है, क्योंकि यह एक प्राइवेट कंप्लेंट (सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर) पर आधारित है, न कि किसी FIR (फर्स्ट इन्फॉर्मेशन रिपोर्ट) पर।
कोर्ट का मुख्य तर्क:PMLA के तहत मनी लॉन्ड्रिंग का केस तभी बन सकता है जब “प्रेडिकेट ऑफेंस” (अंडरलाइंग क्राइम) का शेड्यूल्ड ऑफेंस हो और उसके लिए FIR दर्ज हो।
यहां मूल केस BJP नेता सुब्रमण्यम स्वामी की 2012 की प्राइवेट कंप्लेंट पर चल रहा था, जिसमें FIR नहीं थी।
कोर्ट ने कहा: “बिना FIR या शेड्यूल्ड ऑफेंस के PMLA की जांच और प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट मेंटेनेबल नहीं है।”
इससे सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों (सुमन दुबे, सैम पित्रोदा, यंग इंडियन कंपनी आदि) को बड़ी राहत मिली है। ED की यह कंप्लेंट डिसमिस हो गई।




