आज दिशोम जाहेर, करनडीह (जमशेदपुर) में आयोजित 22वें संताली “परसी महा” एवं ओलचिकी लिपि के शताब्दी वर्ष समारोह में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु एवं राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के साथ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सम्मिलित हुए।सरकार के प्रयासों से परंपरागत क्षेत्रों के साथ-साथ defence, space और atomic energy जैसे गैर-पारंपरिक क्षेत्र भी युवाओं को उद्यम स्थापित करने के अवसर प्रदान कर रहे हैं। तकनीकी रूप से सक्षम आप जैसे युवा इन अवसरों का उपयोग करके न केवल अपने लिए, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार सृजन कर सकते हैं।NIT जमशेदपुर जैसे महत्वपूर्ण हितधारकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे आधुनिक तकनीकों का सामान्य-जन और समाज पर पड़ने वाले कुप्रभावों के नियंत्रण और समाधान में भागीदारी करेंगे। वे न केवल समाधान खोजेंगे, बल्कि अन्य संस्थाओं और उद्योग जगत के साथ सहयोग करके उन समाधानों को ‘सतत और स्थाई समाधान’ में बदलेंगे।NIT जैसे संस्थानों में शिक्षित engineers को ऐसे nation-builders की भूमिका निभानी चाहिए जो तकनीकी-विकास को मानव-कल्याण का माध्यम बनाएँ। किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की प्रतिष्ठा केवल उनकी रैंकिंग या प्लेसमेंट से नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि वह संस्थान और उसके विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के लिए किस प्रकार योगदान दे रहे हैं।विकसित भारत का सपना केवल ऊँची इमारतों या शक्तिशाली अर्थव्यवस्था के निर्माण से पूरा नहीं होगा, बल्कि एक ऐसे समाज के निर्माण से होगा जिसमें अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के पास भी अवसर की समानता और गरिमापूर्ण जीवन जीने की सुविधा हो। आपकी शिक्षा और ज्ञान को तभी सफल माना जाएगा जब उसका लाभ जन-सामान्य तक पहुंचे।




