ऑनलाइन सर्वे से ड्रॉपआउट बच्चों की होगी पहचान,3 महीने से अधिक ड्रॉपआउट बच्चों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण, डहर 2.0 हो रहा तैयार

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झारखंड के सरकारी स्कूलों के बच्चों की शिशु पंजी के लिए ऑनलाइन सर्वे होगा। हर सरकारी विद्यालयों को शिशु पंजी सर्वे के लिए गांव-टोलों से टैग किया जाएगा। शिशु पंजी सर्वे को डिजिटल रूप देने के लिए स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा डहर 2.0 मोबाइल और वेब बेस्ड एप्लीकेशन तैयार किया जा रहा है।शिक्षा सचिव उमाशंकर सिंह के निर्देश पर पोर्टल निर्माण के लिए तीसरे दौर की राउंड टेबल बैठक गुरुवार को संपन्न हुई। इसमें झारखंड शिक्षा परियोजना निदेशक शशि रंजन, आउट ऑफ स्कूल की प्रभाग प्रभारी बिनीता तिर्की, राज्य एमआईएस समन्वयकसचिन कुमार समेत अन्य शामिल हुए। प्रभाग प्रभारी बिनीता तिर्की ने कहा कि इस पोर्टल के माध्यम से सर्वे में सरकारी विद्यालय शिशु पंजी सर्वे के लिए गांव व टोलों से टैग किए जाएंगे.

तीसरी से 18 वर्ष वर्ग के बच्चों के विद्यालय में नामांकन, ड्रॉपआउट का पता लगाया जाएगा। अगर कोई बच्चा विद्यालय में कभी नामांकित नहीं हुआ है, तो उसे आउट ऑफ स्कूल माना जाएगा। वहीं, वैसे बच्चों को भी आउट ऑफ स्कूल माना जाएगा, जो बच्चे सर्वे तिथि से एक माह पूर्व से लगातार स्कूल से बाहर हैं। ऐसे बच्चो को चिन्हित कर विद्यालय से जोड़ने का सरकार प्रयास करेगी। जो बच्चे सात साल से ऊपर के स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग द्वारा मोबाइल और वेब ऐप तैयार किए जा रहे आयु के हैं और लगातार तीन महीने या उससे अधिक समय से ड्राप आउट हैं, उनके लिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत विशेष प्रशिक्षण, कोचिंग की व्यवस्था के लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराने के लिए समग्र शिक्षा के आगामी बजट में भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

वर्ष 2025-26 के लिए कराये गए शिशु पंजी सर्वे में 59,094 बच्चों को आउट ऑफ स्कूल-ड्रॉप आउट चिन्हित किया गया था। शिक्षा विभाग के निरंतर प्रयास से इनमें से 53,253 बच्चों को विद्यालय से पुनः जोड़ने में कामयाबी मिली है। यह कुल लक्ष्य का 90.11 प्रतिशत है। विभाग लगातार आउट ऑफ स्कूल-ड्राप आउट बच्चों को विद्यालय से पुनः जोड़ने का प्रयास कर रहा है।

संबंधित प्रस्ताव भी तैयार कर भारत सरकार को भेजा जायेगा। सर्वे में बच्चों के ड्रॉप आउट के कारणों का भी पता लगाया जाएगा। सभी शिक्षकों को सर्वे में भाग लेने का निर्देश विभाग द्वारा दिया गया है, सर्वे नहीं करने वाले या सर्वे में लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों की सूची बनाकर उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जायेगी। सर्वे में बच्चो का पूरा पता लिया जाएगा, ताकि भविष्य में उन्हें ट्रैक किया जा सके।

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