गोल्ड मेडलिस्ट सुनीता उरांव के हाथ में झाड़ू, मरांडी ने हेमंत सरकार पर साधा निशाना

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babulal marandi

रांची। झारखंड की खेल प्रतिभा और सरकारी व्यवस्था को लेकर एक मामला इन दिनों चर्चा में है। थ्रोबॉल और वॉलीबॉल में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए दो गोल्ड समेत पांच पदक जीतने वाली खिलाड़ी सुनीता उरांव के कथित तौर पर रांची स्थित खेल निदेशालय में झाड़ू-पोछा करने की तस्वीर और जानकारी सामने आने के बाद सरकार की खेल नीति पर सवाल उठ रहे हैं।दावा किया जा रहा है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण सुनीता को अपनी खेल प्रतिभा के अनुरूप रोजगार नहीं मिल सका और वह खेल निदेशालय में सफाई का काम कर रही हैं। इस मामले ने खिलाड़ियों के सम्मान, रोजगार और सरकारी सहायता को लेकर बहस छेड़ दी है।

मेडल जीतने वाली खिलाड़ी को सम्मानजनक रोजगार की मांग

सुनीता उरांव की स्थिति को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि राज्य और देश के लिए पदक जीतने वाली खिलाड़ियों को क्या उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार और आर्थिक सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। खेल जगत से जुड़े लोगों और राजनीतिक नेताओं की ओर से सरकार से सुनीता को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने तथा उनके लिए सम्मानजनक रोजगार सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है।भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने भी इस मामले को लेकर झारखंड सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य की खेल प्रतिभाओं, विशेषकर आदिवासी खिलाड़ियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।

खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में खेल विभाग के खर्च और प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि खेल आयोजनों और प्रचार-प्रसार पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जबकि पदक जीतने वाले खिलाड़ियों की आर्थिक और रोजगार संबंधी स्थिति पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल करते हुए सुनीता उरांव को उनकी योग्यता के अनुरूप सम्मानजनक रोजगार देने की मांग की।बाबूलाल मरांडी ने लिखा,”हेमंत जी, तनिक भी शर्म है या नहीं? जिस बेटी ने झारखंड के लिए मेडल जीते, क्या उसका इतना भी अधिकार नहीं कि उसे उसकी योग्यता के अनुसार सम्मानजनक रोजगार मिले?यदि सरकार के पास प्रचार-प्रसार और दूसरे कामों के लिए करोड़ों रुपये हैं, तो सुनीता उरांव जैसी प्रतिभावान बेटी के सम्मान और भविष्य के लिए क्यों नहीं?अगर तनिक भी संवेदना और शर्म बची है तो सुनीता उरांव के हाथों से झाड़ू हटाइए, उनके हाथ में सम्मानजनक रोजगार दीजिए और उनकी प्रतिभा के साथ न्याय कीजिए।”

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