इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा ‘यूपी बोर्ड आफ मदरसा एजुकेशन एक्ट 2004’ को रद्द करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका के सिलसिले में NCPCR ने अपनी लिखित दलीलें दी है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को लिखित दलीलें देते हुए कहा कि मदरसों में बच्चों को उचित तरीके से शिक्षा नहीं मिल रही है। मदरसे बुनियादी आवश्यकताओं को पूरा करने में विफल होकर बच्चों के अच्छी शिक्षा के मौलिक अधिकार का उल्लंघन कर रहे हैं। यह शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रविधानों के विरुद्ध है। NCPCR का कहना है कि मदरसों में इस्लाम को सर्वोच्च माना जाता है और इस्लाम की शिक्षा को ही प्रमुखता दी जाती है।




