झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज फिर ईडी द्वारा जारी समन में शामिल नहीं हुए।सीएम हेमंत सोरेन ने जमीन घोटाला मामले में ईडी की ओर से दोबारा समन भेजे जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने ईडी के समन को एक प्रकार से चुनौती देते हुए रिट पिटीशन दायर किया है। इसी मामले को लेकर ट्वीट कर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन से एक सवाल किया है”झारखंड सोरेन राज(महाजन) परिवार के एक्सिडेंटल राजकुमार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी से एक सवाल-सुना है आदिवासियों की बेहिसाब ज़मीन-जायदाद हड़पकर खुद के नाम कर लेने से जुड़े मनी लॉंड्रिंग मामले में @dir_ed के दुबारा बुलावे पर भी आप डर के मारे ईडी के सवालों का जवाब देने नहीं गये। क्योंकि आदिवासी ज़मीन हड़पने के महापाप से जुड़े सवालों का कोई जवाब नहीं है आपके पास।आपने ईडी को चिट्ठी लिखकर कहा है कि आप इस बुलावे के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गये हैं, इसलिये फ़ैसला आने तक कोई कार्रवाई/पूछताछ/सम्मन नहीं की जाय।सिर्फ़ कोर्ट चले जाने भर से कोई जॉंच एजेंसी/पुलिस से कोई कार्रवाई जारी नहीं रखने वाली यह सुविधा आपको सिर्फ़ खुद के साथ सोरने परिवार के लिये ही चाहिये या आप झारखंड के उन पीड़ित लोगों को भी यह सुविधा देंगे जिन पर पुलिस का केश मुक़दमा हुआ है और वे अग्रिम ज़मानत या स्टे के लिये कोर्ट में गये हुए हैं?बेहतर होगा कि आप जैसी सुविधा क़ानून से हटकर खुद के लिये चाहते हैं ठीक उसी तरह एक लोक कल्याणकारी आदेश निकाल दीजिये कि झारखंड में जो कोई भी किसी मामले में कोर्ट में चला जायेगा उससे कोर्ट से कोई आदेश आने तक न तो पुलिस पूछताछ करेगी न कोई कार्रवाई करेगी।आपके इस नेक काम से न सिर्फ़ आपका बल्कि झारखंड के केश-मुक़दमा और पुलिस प्रताड़ना से प्रभावित हज़ारों नहीं लाखों लोगों का कल्याण हो जायेगा।आपके पास बेहिसाब पैसा है, आप अपने ख़िलाफ़ जॉंच को भटकाने, लटकाने के लिये देश के मंहगे वकीलों पर करोड़ों रूपये खर्च कर सुप्रीम कोर्ट चले जाते हैं। लेकिन कभी झारखंड के उन गरीब आदिवासियों को भी अपने जैसी करोड़ों के खर्च वाली यही सुविधा देने के बारे में आपने सोचा है जो क़ानूनी दाँवपेंच में फँसे हैं, जेल में सड़ रहे हैं, पुलिस उनका जीना हराम किये हुए है, लेकिन पैसे के अभाव में वे यातना-प्रताड़ना की चक्की में पिस रहे हैं।”



