रांची के कांके प्रखंड के पेरतोल गांव की सावित्री कुमारी का परिवार पहले केवल खेती पर निर्भर था | ‘शीतल महिला समूह’ से जुड़ने के बाद उनकी ज़िंदगी में कई सकारात्मक बदलाव आए। सावित्री बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकों की जानकारी मिली।सावित्री मड़ुआ, घंघरा तथा उरद जैसी पारंपरिक व पौष्टिक दलहन फसलों को उगाती हैं। खेती के साथ-साथ उन्होंने सूकर पालन एवं मछली पालन भी शुरू किया, जिससे उनकी आमदनी बढ़ी है।हाल ही में उन्हें मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के अंतर्गत प्रोत्साहन राशि प्राप्त हुई, जिससे उन्होंने बतख पालन की शुरुआत की है। अब वह इसे भी पूरी लगन और मेहनत से आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं। इन सभी अजीविकाओं से सालाना 3 से 4 लाख रुपए की आमदनी कर वह लखपति दीदी के तौर पर पहचानी जाती हैं।
रांची के रातु प्रखंड अंतर्गत धनैसोसो गांव की संपत्ति देवी गुलाब महिला समूह की सदस्य हैं| पति के निधन के बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी अकेले उनके कंधों पर आ गई। समूह से मिले ऋण की मदद से उन्होंने घर की आवश्यक जरूरतें पूरी की साथ ही गाय एवं बकरी भी खरीदीं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया।हाल ही में उन्होंने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से मिली सहायता राशि से 45 सोनाली मुर्गियां खरीदी हैं। सोनाली मुर्गी के अंडों की कीमत 15 से 20 रुपये प्रति पीस तक होती है, जिससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होने की उम्मीद है | मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना उनके जैसी हजारों महिलाओं के लिए नई आशा की किरण बन रही है।
रांची के नगड़ी प्रखंड की रेखा देवी, कल्याणी महिला समूह की सदस्य हैं। रेखा समूह से जुड़कर अपनी आजीविका के लिए उन्नत विधि से सब्जी की खेती तथा बकरी पालन करती हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के तहत मिली राशि से उन्होंने और बकरियां खरीदी। अभी उनके पास आठ बकरियां हैं, साथ ही खेती बाड़ी से उनकी सालाना आय डेढ़ से दो लाख रुपए तक हो रही है। रेखा एक खुशहाल जीवन जी रही हैं, जिसका श्रेय वह सखी मंडल एवं झारखंड सरकार को देती हैं ।




