झारखण्ड के वनोत्पाद को मिल रहा अंतर्राष्ट्रीय बाजार

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झारखण्ड: सिद्धकोफेड ने टविंवा इंडिया लिमिटेड के साथ करंज के बीच को लेकर समझौता किया है।झारखंड का करंज अब विदेश तक पहुंच रहा है।अंतरराष्ट्रीय कंपनी टर्विवा इंडिया लिमिटेड ने सिदो-कान्हू एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट प्रोड्यूस को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (सिद्धकोफेड) से पिछले महीने एमओयू के बाद दो महीने में ही कंपनी को 10 मीट्रिक टन बीज की आपूर्ति हो पाई है। हालांकि इस वित्तीय वर्ष में कंपनी का यहां से 100 मीट्रिक टन बीज खरीदने का लक्ष्य है। करंज के बीज से कंपनी सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल का रॉ मैटिरियल तैयार कर इसे यूरोपीय देशों में निर्यात कर रही है। केंद्र सरकार ने करंज के बीच का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 22 रुपए प्रति किलो राखी है,जबकि टर्विवा इंडिया लिमिटेड 47 से 48 रुपए प्रति किलो की दर से खरीद रहा है। अगले वित्तीय वर्ष से लक्ष्य बढ़ाने की तैयारी है। टर्विवा प्रोक्योरमेंट मैनेजर अर्धया चौधरी के ने कहा कि आने वाले वक्त में कंपनी झारखंड में अपना प्रोसेसिंग प्लांट लगाने पर विचार कर रही है।राज्य के सात जिलों सिमडेगा, गुमला, लोहरदगा, खूंटी, सरायकेला खरसावां, चाईबासा, हजारीबाग और गिरिडीह में सबसे ज्यादा करंज के पेड़ हैं। इसलिए फिलहाल इन्हीं जिलों से करंज के बीज की आपूर्ति हो रही है। इन जिलों में खरीदारी के लिए लैंपस और पैक्स के लोगों को सिद्धकोफेड और टर्विवा की ओर से से ट्रेनिंग भी दी गई है। हाल ही में सिद्धकोफेड ने इन जिलों के संग्रहकर्ताओं के साथ बैठक की थी।

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