झारखण्ड की अर्थव्यवस्था तेजी से लौट रही पटरी पर , वित्तीय स्थिति के मामले में झारखंड ने गुजरात को पीछे छोड़ा

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बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक दास की रिपोर्ट के मुताबिक वित्तीय स्थिति के मामले में झारखंड ने गुजरात को पीछे छोड़ दिया है। झारखंड नौवें स्थान पर था, जो वर्ष 2022-23 में पांचवें स्थान पर पहुंच गया। वहीं गुजरात दो पायदान लुढ़ककर पांचवें से सातवें स्थान पर आ गया। 17 राज्यों की वित्तीय स्थिति पर तैयार इस रिपोर्ट के मुताबिक 2022-23 में महाराष्ट्र पहले स्थान पर था। वहीं छत्तीसगढ़ दूसरे, ओडिशा तीसरे, तेलंगाना चौथे और झारखंड पांचवें स्थान पर आ गया। सबसे खराब स्थिति पश्चिम बंगाल, पंजाब, बिहार, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की है।झारखण्ड की अर्थव्यवस्था तेजी पर पटरी पर लौट रही है। कंस्ट्रक्शन के काम में तेजी, आर्थिक गतिविधियां बढ़ने और बजट आकार बढ़ने से इसमें काफी सुधार हुआ है। कोविड काल 2020-21 को छोड़ दें तो वित्तीय वर्ष 2018-19 से अब तक राज्य का राजकोषीय घाटा तीन प्रतिशत से कम रहा है। यही नहीं, यह हमेशा राजकोषीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन (एफआरबीएम) कानून की सीमा के अंदर रहा है। डॉ बैंक (इंडिया) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में भी राज्यों की राजकोषीय स्थिति के मामले में झारखंड को बेहतर बताया गया है। भविष्य में वित्तीय संकट से बचने के लिए झारखंड सरकार ने कंसोलेटेड सिंकिंग फंड (समेकित निषेक्ष निधि) बनाया है। तीन साल में फंड में 200 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। हर साल सरकार इसमें कुल बकाए ऋण का 5% देगी। सिंकिंग फंड का भविष्य में बकाया ऋण के भुगतान में उपयोग हो सकता है। यदि ऋण का कोई गारंटर चूक करता है, तो इस फंड से पैसे का ‘भुगतान किया जा सकता है।वर्ष 2020-21 में राज्य की वित्तीय स्थिति भी कोविड से प्रभावित हुई। लेकिन, कुशल वित्तीय प्रबंधन से जल्द सुधर गया। वर्ष 2021-22 के बजट में 10% की वृद्धि हुई। वर्ष 2022-23 में अनुमानित बजट पहली बार 1 लाख करोड़ से अधिक रहा। वर्ष 2023-24 में यह 1.16 लाख करोड़ रुपए हो गया। बजट में राज्य के अपने टैक्स व अन्य स्रोतों से मिलने वाले पैसे का अंश भी बढ़ा है यह भी मजबूत वित्तीय स्थिति का संकेत है।पिछले कुछ वर्षों में राज्य के बजट में वृद्धि हुई है। साथ ही, अपने स्त्रोतों से मिलने वाले राजस्व का अंश भी बढ़ा है। इससे राजकोषीय घाटा नियंत्रित हो रहा है। लोक ऋण का आकार निर्धारित ऋण सीमा के अंदर है। इससे ब्यान की अदायगी राजस्व संग्रह के 10% से कम रही है।भविष्य में वित्तीय संकट से बचने के लिए झारखंड सरकार ने कंसोलेटेड सिंकिंग फंड (समेकित निषेक्ष निधि) बनाया है। तीन साल में फंड में 200 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं। हर साल सरकार इसमें कुल बकाए ऋण का 5% देगी। सिंकिंग फंड का भविष्य में बकाया ऋण के भुगतान में उपयोग हो सकता है। यदि ऋण का कोई गारंटर चूक करता है, तो इस फंड से पैसे का ‘भुगतान किया जा सकता है।

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