रांची। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने देश में पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को कथित तौर पर मिल रहे भारी-भरकम चंदे को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। आज प्रेस कांफ्रेंस में उन्होंने दावा किया कि देश में 2800 से अधिक राजनीतिक दल पंजीकृत हैं, जिनमें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों के अलावा बड़ी संख्या में दल गैर-मान्यता प्राप्त हैं।विनोद पांडेय ने कहा कि इनमें से कुछ गैर-मान्यता प्राप्त दलों को कथित तौर पर सैकड़ों करोड़ रुपये का चंदा मिला है, जबकि कई दलों की राजनीतिक गतिविधियां बेहद सीमित हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ पार्टियों के कार्यालय बंद मिले या बेहद छोटे स्तर पर संचालित होते पाए गए। ऐसे में उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम इन दलों को कहां से और किस उद्देश्य से मिल रही है।
झामुमो प्रवक्ता ने 2023-24 के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि कुछ गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के खातों में 1000 करोड़ रुपये तक की राशि होने की बात सामने आई है। उन्होंने ‘लोक साही सत्ता पार्टी’ का उदाहरण देते हुए दावा किया कि इस पार्टी को करीब 1,045 करोड़ रुपये मिले और पार्टी की ओर से करीब 900 से 950 करोड़ रुपये खर्च दिखाया गया।उन्होंने कहा कि यदि कोई राजनीतिक दल चुनाव नहीं लड़ता, उसकी सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियां नजर नहीं आतीं और इसके बावजूद उसके पास सैकड़ों करोड़ रुपये का चंदा पहुंचता है, तो इसकी जांच जरूरी है। पांडेय ने सवाल किया कि ऐसे दलों को मिलने वाले चंदे और उनके खर्च का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।
चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों पर सवाल
विनोद पांडेय ने चुनाव आयोग, आयकर विभाग और जांच एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि इन दलों को बड़ी मात्रा में चंदा मिल रहा है तो चुनाव आयोग और आयकर विभाग इसकी जांच क्यों नहीं कर रहे हैं। उन्होंने ईडी और सीबीआई जैसी एजेंसियों से भी इस पूरे मामले को संज्ञान में लेने की मांग की।झामुमो प्रवक्ता ने आशंका जताई कि कहीं इन माध्यमों का इस्तेमाल काले धन को वैध बनाने के लिए तो नहीं किया जा रहा है। हालांकि, उन्होंने इसे जांच का विषय बताते हुए पूछा कि चंदा देने वालों की पहचान और धन के स्रोत की जांच कब होगी।
‘विधायक-सांसद खरीदने में इस्तेमाल तो नहीं हो रहा?’
पांडेय ने आरोपों के बीच एक और गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में विधायकों और सांसदों की खरीद-फरोख्त को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं इन दलों के माध्यम से आने वाले धन का इस्तेमाल ऐसे राजनीतिक उद्देश्यों के लिए तो नहीं किया जा रहा।उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है और संबंधित एजेंसियों का दायित्व बनता है कि वे इन राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे, उनके खर्च और धन के स्रोत की जांच करें।विनोद पांडेय ने कहा कि झामुमो यह मुद्दा संबंधित संवैधानिक और जांच एजेंसियों के समक्ष उठा रहा है, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच हो सके और यदि कहीं वित्तीय अनियमितता है तो उसका खुलासा किया जा सके।




