22 साल के झारखंड में बेरोजगारों को नौकरी देने के लिए दो बार नियोजन नीति बनी। दोनों नियोजन नीति रद्द भी हुई। अब तीसरी नियोजन नीति लाने की तैयारी चल रही है। बताया जा रहा है कि 27 फरवरी को होने वाले कैबिनेट की बैठक में तीसरी और नयी नियोजन नीति पर मुहर लगेगी। इस राज्य में नियोजन नीति बनने और रद्द होने की प्रक्रिया में 11 लाख से अधिक आवेदन रद्द किए गए। युवा बेरोजगारों की उम्मीदों पर पानी फेरा गया। एक बार फिर नियोजन नीति बनने से राज्य के बेरोजगारों को उम्मीदें हैं। वहीं सरकार को भी विश्वास है कि अबकि बार नियोजन नियमावली में किसी तरह का विवाद नहीं होगा।
रघुवर दास सरकार में राज्य को पहली नियोजन नीति मिली। यह नीति 14 जुलाई 2016 को अधिसूचना जारी कर लागू किया गया। इस नीति में राज्य के 24 जिला में से 13 जिला को अनुसूचित घोषित किया गया। यह नियोजन नीति कोर्ट में गयी। जिसे सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया।
हेमंत सोरेन की सरकार ने दूसरी नियोजन नीति बनाई। इस नीति के तहत थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरी में सामान्य वर्ग के उन्हीं लोगों को नौकरी मिलती जिन्होंने झारखंड से मैट्रिक और इंटर की परीक्षा पास की हो। कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताया और नीति को रद्द कर दिया।
इसलिए तीसरी नियोजन की पड़ी जरूरत झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार में बनी नियोजन नीति को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। इसके बाद शीतकालीन सत्र के दौरान सीएम हेमंत सोरेन ने कहा कि जैसा युवा चाहेंगे वैसी नियोजन नीति बनाएंगे। इसका जाप्ता विज्ञापन भी निकाला गया। तीसरी और नयी नियोजन के लिए उम्मीदवारों से राय ली गयी। लगभग 10 लाख युवाओं से ऑडियो माध्यम से राय ली गयी। सीएम हेमंत सोरेन की आवाज में युवाओं से दो सवाल पूछा गया।
पहला – वर्ष 1932 के खतियान आधारित स्थानीय नीति और पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण के विषय को नौवीं अनुसूची में शामिल होने का इंतजार करें?
दूसरा- वर्ष 2016 से पहले की नियोजन नीति के आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जाए?
राज्य सरकार 2016 से पहले जिस प्रक्रिया के तहत नियुक्ति करती थी, उसी को अपनाने पर विचार की है। साल 2016 पहले आवेदन के दौरान उम्मीदवारों से पूछा जाता था कि आप झारखंड के मूल निवासी हैं या नहीं। अगर उम्मीदवार का जवाब “हां” होता तो उससे उसका आधार नंबर मांगा जाता था। इसके अतिरिक्त उस समय 50 फीसदी सीट ओपन था और 50 फीसदी आरक्षित श्रेणी के लिए था। ו पहले 50-50 फीसदी था। अब कुल सीट का 40 फीसदी ओपन, 10 फीसदी इडब्ल्यूएस और 50 आरक्षित होगा। इसके अतिरिक्त दूसरी नियोजन नीति को हाईकोर्ट से रद्द किए जाने के बाद 11 जनवरी को सीएस सुखदेव सिंह की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस बैठक में दो प्रस्ताव सामने आए। हालांकि अंतिम निर्णय सीएम हेमंत सोरेन पर छोड़ा गया है। पहला प्रस्ताव, राज्य के मान्यता प्राप्त संस्थान ने मैट्रिक- इंटर पास करने की अनिवार्यता हटाई जाए। दूसरा प्रस्ताव, उम्मीदवारों को स्थनीय रीति-रिवाज, भाषा एवं परिवेश के ज्ञान होने की अनिवार्यता हटाई जाए।
11 लाख आवेदन किए गए हैं रद्द
- झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा 3,82, 211
झारखंड सामान्य स्नातक योग्यताधारी संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा – 3,50, 467 - तकनीकी / विशिष्ट योग्यताधारी स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा
स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा
स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा – 69,878 - झारखंड नगरपालिका सेवा संवर्ग संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा – 40,156
- झारखंड प्रयोगशाला सहायक प्रतियोगिता परीक्षा – 21,354
- झारखंड सचिवालय आशुलिपिक प्रतियोगिता परीक्षा -21456
- झारखंड इंटर स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा – 1,73,966
झारखंड डिप्लोमा स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा – प्रक्रियाधीन - झारखंड मैट्रिक स्तर संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा – प्रक्रियाधीन
झारखंड के सीएएम हेमंत सोरेन ने नियुक्ति कार्य में तेजी लाने का निर्देश अधिकारियों को दिया है। सीएम ने कार्मिक विभगा के अधिकारियों से कहा है कि 31 अक्टूबर 2021 तक नियुक्ति व सेवाशर्त नियमावली में विसंगतियों को दूर करने का निर्देश दिया है। उन्होंने झारखंड लोक सेवा आयोग व झारखंड कर्मचारी चयन आयोग आपस में बेहतर समन्वय स्थापित कर नियुक्ति कार्यों में तेजी लाएं। किसी भी विभाग की ओर से भर्तियों को लंबित न रहने दिया जाए। हेमंत सोरेन ने कहा- की मंशा है कि ज्यादा से ज्यादा युवाओं का राजगार मिले और नियुक्ति हो।
हेमंत सोरेन ने कहा- “राज्य सरकार की मंशा है कि ज्यादा से ज्यादा युवाओं को रोजगार मिले और नियुक्ति प्रक्रिया किसी भी स्तर पर लंबित नहीं रहे। CM ने कहा कि सभी विभागों में लंबित नियुक्ति प्रक्रियाओं को एक निश्चित समय सीमा के अंतर्गत हर हाल में पूरा कर लिया जाए। इसके लिए एक बेहतर प्लान बनाकर काम करें। “
नई नियमावली का सभी विभाग में कराएं पालन वर्ग तीन व चार से संबंधित नियुक्तियों के संबंध में कार्मिक विभाग के आलोक में नियमावली में जो संशोधन किए गए हैं उसका अनुपालन सभी विभाग जल्द सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है। CM ने कहा कि इससे राज्य के युवाओं को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेगा और विभिन्न विभागों में रिक्त पड़े पदों को तत्काल भरा जा सकेगा।



