टाटा कंपनी झारखण्ड में केवल मूलवासियों को देगी अधिकाँश नौकरियां

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झारखंड में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के उद्देश्य से सरकार ने निजी कंपनियों में 75 फीसदी स्थानीय लोगों को नौकरी देने का फैसला लिया है. ऐसे में टाटा स्टील ने राज्य सरकार के नौकरियों में 75 फीसदी स्थानीय लोगों को आरक्षण देने के आदेश का पालन करते हुए एक सर्कुलर जारी किया है. इसमें सभी ठेकेदारों, वेंडरों को 75 फीसदी स्थानीय को ही नौकरी पर रखने का आदेश दिया गया है. इसके साथ ही सर्कुलर में कर्मचारियों की ट्रेनिंग कराकर उन्हें < PREV ग्रेड करने के लिए भी कहा गया है. बता दें कि राज्य सरकार की ओर से कंपनिया को नोटिस भेजी गयी थी. इसमें सभी वेंडरों और अनुषंगी कंपनियों को एक फॉर्म भरकर देने को कहा गया है.
इसमें उनसे आंकड़ा मांगा गया है कि उनके अधीन कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं? इसमें उनके ग्रेड क्या हैं और किस ग्रेड में कितने स्थानीय हैं? स्थानीय का प्रमाण पत्र भी जमा कराने को कहा गया है. टाटा स्टील ने अपनी सभी अनुषंगी कंपनियों से यह आंकड़ा मांगा है. इसे लेकर एचआरएम विभाग की ओर से पहल तेज की गई है. सर्कुलर में कहा गया है कि इस माह के अंत तक दस्तावेजों को जमा करा दें ताकि इसकी रिपोर्ट सरकार को भी भेजी जा सके. दरअसल, झारखंड सरकार ने निजी क्षेत्र की कंपनियों में 40 हजार रुपये तक वेतनवाले पदों पर 75% स्थानीय लोगों को बहाल करने का कानून बनाया है. पिछले वर्ष आठ सितंबर को
कानून बनाया है. पिछले वर्ष आठ सितंबर को झारखंड विधानसभा ने इस विधेयक को पारित किया था. टाटा स्टील में 100 से अधिक वेंडर्स हैं, जबकि उसके अधीन करीब 19 हजार ठेका कर्मी हैं. इसमें सभी ग्रेड के कर्मचारी हैं. वहीं टाटा स्टील के दस एंसीलियरी कंपनियां हैं, जो टाटा स्टील से जुड़ी हैं. इन सारी कंपनियों में स्थायी और ठेका कर्मचारियों को मिलाकर करीब 25 हजार कर्मचारी हैं.

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