धनबाद: सोशल मिडिया पर एक वीडियो में एक व्यक्ति एक महिला को झाडू से पीट रहा है. मंत्री दीपक बिरुआ ने इस पर ऐक्शन लेते हुए कारवाई के निर्देश जारी किए हैं. झारखंड पुलिस को टैग करते हुए मंत्री दीपक बिरुआ ने लिखा “यह अशोभनीय है,बात किसी की जात-पात की नहीं बल्कि महिला उत्पीड़न की है जो झारखंड सरकार कभी बर्दाश्त नहीं करेगी..” धनबाद डीसी को टैग करते हुए मंत्री ने आगे लिखा “अविलंब कार्यवाही करें..”
पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़िता का नाम मंजू देवी वाल्मीकि है, जो झरिया की वाल्मीकि कॉलोनी की रहने वाली हैं और पेशे से सफाईकर्मी हैं। यह घटना सोमवार की बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि 55 वर्षीय कपड़ा व्यापारी सुनील केसरी ने अपनी दुकान के सामने का कचरा साफ करने का आदेश दिया, जब मंजू देवी ने यह काम बिना पैसे या मेहनताने के करने से मना कर दिया, तो दुकानदार आगबबूला हो गया। पीड़िता के बेटे राजा कुमार वाल्मीकि ने बताया कि, ”वहां मौजूद एक राहगीर ने घटना का वीडियो तो बना लिया, लेकिन उस वक्त मेरी मां को बचाने या आरोपी को रोकने के लिए कोई भी आगे नहीं आया।”
दरअसल ये वीडियो ”ट्राइबल आर्मी” नामक एक्स हैंडल पर शेयर किया गया है, जहाँ से मंत्री तक घटना की वीडियो पहुंची, जिसमें लिखा गया है कि”26 जनवरी को झारखंड के झरिया में 46 वर्षीय दलित सफ़ाईकर्मी मंजू देवी से दुकानदार सुनील केशरी ने इसलिए बेरहमी से मारपीट की क्योंकि उन्होंने उसकी दुकान के बाहर कुत्ते की गंदगी मुफ़्त में साफ़ करने से मना कर दिया। मंजू देवी को उसकी झाड़ू से पीटा गया, कपड़े फाड़े गए और “भंगी” जैसे जातिसूचक अपशब्द बोले गए। SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में तत्काल गिरफ़्तारी अनिवार्य है, इसके बावजूद पुलिस ने गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों का हवाला देकर कार्रवाई टाल दी जो यह दिखाता है कि क़ानून ज़मीन पर आते ही कैसे कमजोर कर दिया जाता है। NCRB के आँकड़े बताते हैं कि हर साल SC/ST पर 51 हज़ार से अधिक अत्याचार के मामले दर्ज होते हैं, लेकिन सज़ा की दर 30% से भी कम है। सवाल साफ़ है अगर संविधान के दिन भी दलितों की गरिमा सुरक्षित नहीं, तो न्याय कब मिलेगा?”




