अहम हुआ सीटी स्कैन, एक सवाल उठा झारखंड के लिए जानिए कितने हैं रेडियोलॉजिस्ट?
रेडियोलॉजिस्ट बता रहे हैं कि जितने सीटी स्कैन इस समय करवाए जा रहे हैं, उनमें से 90 फीसदी केस कोरोना पॉज़िटिव मरीज़ों के हैं. ऐसे में खतरे की घंटी यह है कि झारखंड में इन विशेषज्ञों की क्या स्थिति है? कठिनाइयों के इस समय में सीटी स्कैन एक विकल्प के रूप में आया है, जो डॉक्टरों को फेफड़ों में संक्रमण की जांच करने में मदद करता है. सीटी स्कैन के बढ़ते महत्व के चलते रेडियोलॉजिस्ट डॉक्टरों की भूमिका काफी अहम हो गई है, स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट की मानें तो फिलहाल देश में कोरोना के 29 लाख से ज़्यादा एक्टिव केस हैं. इनमें से अनेक केस ऐसे बताए गए हैं, जिनमें लक्षण नहीं हैं या फिर बहुत हल्के हैं. जानकारी की बात यह है कि डॉक्टर को कोविड का शक होने पर एंटीजन टेस्ट या RT-PCR के लिए कहा जाता है. इस टेस्टिंग में किस तरह सीटी स्कैन की अहमियत बढ़ गई है?
यहां कुछ चीज़ें समझनी चाहिए. मसलन ये कि सीटी वैल्यू जितनी कम होती है, संक्रमण उतना अधिक होता है और ये जितना अधिक होती है, संक्रमण उतना ही कम होता है. ICMR यानी Indian Council of Medical Research ने अभी सीटी वैल्यू 35 निर्धारित की है. इसका अर्थ ये है कि 35 और इससे कम सीटी वैल्यू पर कोविड पॉजिटिव माना जाएगा और 35 से ऊपर यदि सीटी वैल्यू है तो पेशेंट को कोविड नेगेटिव माना जाएगा.



