बिहार विधानसभा चुनाव 2020 : प्रोफेसर-वकील बनते थे राजनेता, अब व्यवसायी-किसानों का दबदबा

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Bihar Newsभारतीय स्वतंत्रता संग्राम से लेकर आजादी के बाद संसद व विधानसभा चुनावों की शुरुआती राजनीति में मुजफ्फरपुर के कॉलेज शिक्षकों, शिक्षाविदों व वकीलों की अग्रणी भूमिका रही। प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद एवं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष आचार्य जेबी कृपलानी से लेकर बिहार विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष विंदेश्वरी प्रसाद वर्मा तक दर्जनों नेताओं ने मुजफ्फरपुर में प्राध्यापक और अधिवक्ता के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की और राजनीति के शिखर तक पहुंचे। उच्च शिक्षा के बाद प्रोफेसर एवं अधिवक्ता तो बने, लेकिन नौकरी एवं परिवार की चिंता छोड़कर आजादी की लड़ाई में कूद पड़े। संघर्ष व जेल यात्राओं की वजह से उनकी बड़ी प्रतिष्ठा थी। समाज ने उन्हें शासन की बागडोर सौंपी। आज प्रोफेसर-अधिवक्ता हाशिए पर हैं। व्यवसायी और किसान बागडोर थामे हैं। इनमें कुछ सांसद-विधायक तो कभी खेत पर नहीं जाते हैं, लेकिन नामांकन पत्र में उनका पेशा कृषि ही दर्ज है। चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है। लिहाजा आज भी कई विधायक नन मैट्रिक, मैट्रिक और इंटर पास हैं।
उत्तर बिहार में तिरहुत प्रमंडल का मुख्यालय मुजफ्फरपुर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का बड़ा केन्द्र था। अंग्रेजी शासन काल में प्रमंडल के विभिन्न जिलों के लोग यहां मुकदमा लड़ने आते थे और कस्बाई शहर में अधिवक्ता डेरा डालने लगे। वर्ष 1899 में ग्रियर भूमिहार ब्राह्मण कॉलेज (अब लंगट सिंह कॉलेज) की स्थापना के बाद मुजफ्फरपुर शिक्षा का केन्द्र बना। यहां दूर-दूर से शिक्षाविद् और छात्र पढ़ने-पढ़ाने आए। डॉ. राजेंद्र प्रसाद और सिंध (हैदराबाद) के आचार्य जेबी कृपलानी यहां प्राध्यापक बने। महात्मा गांधी की पहली चंपारण यात्रा के दौरान कृपलानी ने जीबीबी कॉलेज में उनकी मेजबानी की। चंपारण सत्याग्रह के दौरान ही गांधी जी के सानिध्य में राजेंद्र प्रसाद आए। गांधी जी से प्रभावित होकर वरीय अधिवक्ता, शिक्षक व छात्र स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े। कृपलानी कांग्रेस अध्यक्ष बने और कई बार देश के अलग-अलग क्षेत्रों से सांसद निर्वाचित हुए। उनकी पत्नी सुचेता कृपलानी उत्तर प्रदेश में भारत की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। देश गणतंत्र हुआ तो राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रपति बनाए गए।कांटी विधानसभा क्षेत्र में आडीएस कॉलेज का जादू चला। क्रमश: प्रो. शंभू शरण ठाकुर(1972), प्रो. ठाकुर प्रसाद सिंह (1977) एवं प्रो. नलिनी रंजन सिंह(1980,85,90) विधायक और राज्य सरकार में मंत्री बने। इसी कॉलेज के प्रो. रामकृपाल सिन्हा मोरारजी देसाई सरकार में मंत्री रहे। प्रो. सीताराम सिंह सांसद और बिहार में मंत्री रहे। गोयनका कॉलेज सीतामढ़ी के गणित के प्रो. रघुवंश प्रसाद सिंह बिहार और केंद्र में मंत्री बने। लोहिया कॉलेज के गणित के प्रो. रामचंद्र पूर्वे राज्य सरकार में मंत्री रहे हैं। एमपी सिन्हा साइंस कॉलेज में प्राध्यापक बनने से पहले प्रो. अरुण कुमार सिन्हा 1977 में लालगंज से विधायक बन गए थे। इसी कॉलेज के प्रो. महाचंद्र प्रसाद सिंह राज्य सरकार में मंत्री बने। रामेश्वर सिंह कॉलेज के प्राचार्य नागेंद्र प्र. सिंह मीनापुर से 1977 में विधायक बने। प्रो. वामेश्वर सिंह जलालपुर से और प्रो. शिवनंदन राय कुढ़नी से विधायक बने। एलएनटी कॉलेज के प्रो. संजय कुमार सिंह एमएलसी हैं।आज मुजफ्फरपुर के 11 में से पांच विधायक किसान और चार व्यवसायी हैं। सिर्फ औराई के राजद विधायक डॉ. सुरेंद्र कुमार पीएचडी की उपाधि लेने के बाद कॉलेज के प्राध्यापक हैं। नामांकन पत्र के अनुसार किसान की सूची में शामिल साहेबगंज के विधायक रामविचार राय मैट्रिक, पारू के अशोक कुमार सिंह नौंवी, बरुराज के नंद कुमार राय नन मैट्रिक, कांटी के अशोक चौधरी और सकरा के लालबाबू राम इंटर उतीर्ण हैं।  नंद कुमार राय व्यवसाय भी करते हैं। व्यवसाय से जुड़े मुजफ्फरपुर के विधायक एवं मंत्री सुरेश शर्मा ऑटोमोबाइल डिप्लोमा, कुढ़नी के केदार गुप्ता एवं मीनापुर के राजीव कुमार उर्फ मुन्ना यादव इंटर तथा बोचहां की बेबी कुमारी बीए पार्ट टू तक पढ़ी हैं। गायघाट के महेश्वर प्रसाद यादव (मैट्रिक) सामाजिक कार्यकर्ता हैं। ranjana pandey