दिल्ली: तीन विधेयक पर सदन में हंगामा,संसद के विशेष सत्र में बुधवार को केंद्र शासित प्रदेश क़ानून (संशोधन) विधेयक 2026,संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026,परिसीमन विधेयक 2026 (डीलिमिटेशन बिल 2026) पेश किया गया.अगर ये तीनों विधेयक पारित हो जाते हैं, तो 2029 के अगले आम चुनाव में इस आरक्षण का रास्ता साफ़ हो सकता है.हालांकि, मंगलवार को विपक्षी नेताओं ने इन तीनों विधेयकों की आलोचना की है.दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि परिवार नियोजन पर बेहतर काम करने का उन्हें इनाम मिलने के बजाय नुकसान झेलना पड़ेगा और सीटों को तय करने का आधार जनसंख्या ही होगा तो ज़्यादा जनसंख्या वाले राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में सीटें दक्षिणी राज्यों की तुलना में कहीं ज़्यादा बढ़ जाएंगी और संसद में इन राज्यों से जुड़े मुद्दों को वरीयता दी जाने लगेगी.तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने कहा कि राज्य सरकारों से परामर्श किए बिना परिसीमन को आगे बढ़ाने की कोशिश “लोकतंत्र पर हमला” है.
राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने पर कहा, “ये केवल परिसीमन बिल नहीं है बल्कि संविधान का संशोधन है। उसमें ये चाहते हैं कि पहले परिसीमन हो और उसके बाद तय किया जाए कि कौन सा महिला आरक्षण होना चाहिए। उन्होंने 2023 का संवैधानिक संशोधन तो रद्द कर दिया जो सर्वसम्मित से पास हुआ था। उसमें यही था कि 2026 के बाद जनगणना होगी, उसके बाद परिसीमन होगा और फिर तय किया जाएगा कि महिला आरक्षण होगा। फिर वो उन्होंने रद्द क्यों किया? क्या वे नहीं चाहते कि जनगणना हो? संविधान संशोधन का उनका ही प्रस्ताव था। ये लोग ऐसा नहीं चाहते क्योंकि वे ऐसा कर ही नहीं सकते। वे समझते हैं कि वे हर समय देश की जनता को गुमराह कर सकते हैं… 2011 के बाद कोई और जनगणना नहीं हुई है। उसके आधार पर उन्होंने ये भी नहीं बताया कि कितनी सीटें बढ़ाएंगे…इनका मकसद है कि पहले तो किसी और के कंधे पर बैठकर सरकार बनाओ और फिर उन्हें खत्म करो… निश्चित रूप से वे(भाजपा) सोचते हैं कि हिंदी बेल्ट में उनका प्रभाव ज्यादा है और दक्षिण में अगर 66 सीटें बढ़ भी गईं तो क्या ही फर्क पड़ेगा लेकिन हम इसे पास नहीं होने देंगे।”
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने लोकसभा में सरकार पर परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों के बहाने संविधान और लोकतंत्र को “हाईजैक” करने का आरोप लगाया है।JMM सांसद महुआ माजी ने नारी वंदन शक्ति अधिनियम पर कहा, “…महिला आरक्षण का समर्थन सभी लोग कर रहे हैं… ये हो तो बहुत अच्छा है, हम इसका स्वागत करते हैं… अभी भी हम इसका समर्थन करना चाहते हैं लेकिन इसमें जो संदेह की स्थिति है वो यह है कि इसे परिसीमन से जोड़ दिया गया है। परिसीमन विपक्ष के लिए खतरे का संकेत है क्योंकि इससे दक्षिण राज्यों में सीटें कम हो जाएंगी… तो उसमें न कटौती हो जाए। परिसीमन आयोग क्या करेगा ये सवाल है क्योंकि यहां की संस्थाएं उसे प्रभावित करती रहती है। विपक्ष को ये खतरा है कि उसके वोटर्स को काटकर परिसीमन न किया जाए… कई तरह से संदेह लोगों के दिमाग हैं…”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर कहा, “…मैं अपील करता हूं कि इसे राजनीति के तराजू से मत तोलिए, यह राष्ट्रहित का निर्णय है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन पर कहा, “अगर गारंटी शब्द चाहिए तो मैं गारंटी शब्द का उपयोग करता हूं, अगर वादे की बात करते हैं तो मैं वादा देता हूं… जब नीयत साफ है तो फिर शब्दों का खेल करने की हमें जरूरत नहीं है।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं आज जिम्मेदारी के साथ सदन में कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूर्व हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े, मैं जिम्मेदारी के साथ कहना चाहता हूं कि यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव नहीं करेगी। यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ अन्याय नहीं करेगी। भूतकाल में जो सरकारें रही और जिनके कालखंड में जो परिसीमन हुआ और जो अनुपात चला आ रहा है, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी।”




