रांची : रांची में मनमानी तरीके से स्कूलों में कॉपी और किताबे के दाम वसूले जा रहे है,अभिभावकों को किताब-कॉपी खरीदने में मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है. नर्सरी ,प्रे नर्सरी की किताबे जहाँ 5000 में दिए जा रहे है। वही 5 ,6 के 8000 ,9000 अभिभावकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पार रहा है। अभिभावकों का कहना है कि सीबीएसई व आईसीएसई की किताब की जगह निजी प्रकाशकों की किताबें ही चलाते हैं. इसकी वजह है कमीशन. प्रकाशकों से लेकर किताब विक्रेताओं तक सभी से कमीशन पहले ही फिक्स हो जाता है.उसके बाद किताबो व् कॉपियों का दाम लगाया जाता है। जिसके वजह से अभिभावकों को वही से किताब व् कोपिया लेना परता है 100 के किताब को 400 ,500 में दिया जा रहा है यही वजह है की रांची में किताबो का कारोबार काफी बढ़ गया है । इन स्कूलों के फिक्स होते है दुकान संत फ्रांसिस, लोरेटो कॉवेंट स्कूल,बिशप हार्टमैन, और अन्य स्कूल, नये सत्र की शुरूआत अप्रैल में होती है. लेकिन निजी प्रकाशकों व् डीलर पहले से ही कमीशन फिक्स कर लेते है किस कोर्स में कौन-कौन से प्रकाशकों किताबें कितनी लगनी है ये सब पहले ही फिक्स हो जाता है। और कुछ परसेंट स्कूल लेते है कमीशन।रांची में 70 से 80 स्कूल आईसीएसई और सीबीएसई से रजिस्टर्ड हैं.एक स्कूल में 1000 से 1500 बच्चे है एक बच्चे में 4000 से 5000 अभिभावकों कोपिया व् किताबे में लगते है और कोपिया व् किताबे की दुकान में ओनली कॅश ट्रांसेक्शन लिए जा रहा है पेटीएम, एटीएम, चेक के माध्यम से किताबें नहीं दी जा रही है. वहीं अगर किसी अभिभावक को कॉपी, स्टेशनरी नहीं लेनी है, तो किताब विक्रेता 1 वीक(7 se 10 ) दिनों बाद आने की बात कहते हैं और नहीं देते हैं. और फिर अभिभावक किताब नहीं खरीदते हैं तो उन्हें बाद में स्कूलो से परेशान किया जाता है।



