हजारीबाग, झारखंड |झारखंड में प्रस्तावित झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) से अंगिका, मगही, भोजपुरी और उर्दू जैसी क्षेत्रीय भाषाओं को हटाने के फैसले को बडकागांव की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद ने सवाल खड़े करने वाला फैसला बताया है।अम्बा प्रसाद ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि “सरकार हमारी है, लेकिन भाजपा की नीति नहीं चलेगी।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी अब भी पुराने राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं, जिससे जनभावनाओं की अनदेखी हो रही है।अम्बा प्रसाद ने कहा कि इस मुद्दे पर पूर्व मंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता मिथिलेश ठाकुर ने भी सरकार को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को हटाना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि इससे राज्य की सांस्कृतिक पहचान पर भी असर पड़ेगा।
अम्बा प्रसाद ने कहा है कि विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने भी इस फैसले का विरोध किया है और मांग की है कि इन भाषाओं को पुनः परीक्षा में शामिल किया जाए। विरोध करने वालों का कहना है कि झारखंड जैसे बहुभाषी राज्य में क्षेत्रीय भाषाओं की अनदेखी करना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।अम्बा प्रसाद ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए कहा कि मगही, भोजपुरी, अंगिका और उर्दू को तुरंत पुनः शामिल किया जाए,इस निर्णय के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो,जरूरत पड़ने पर सरकार कानूनी लड़ाई भी लड़े.उन्होंने यह भी कहा कि “अबुआ सरकार” की अवधारणा तभी सार्थक होगी, जब हर भाषा और समाज को समान सम्मान मिलेगा।फिलहाल राज्य सरकार की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मुद्दा लगातार तूल पकड़ता जा रहा है।




