झारखंड की उपलब्धियों की सूची में नया अध्याय जुड़ गया है. पहली बार यहां के आदिवासी समुदाय के दो लोगों को यूनेस्को में अलग-अलग विषयों के लिए को-चेयर (सह अध्यक्ष) चुना गया है. इनमें पहली डॉ सोना झरिया मिंज हैं. उन्हें यूनेस्को के आदिवासी संबंधी शोध के लिए को-चेयर नियुक्त किया गया है. वहीं दूसरे व्यक्ति डॉ एनाबेल बेंजामिन बारा हैं.डॉ एनाबेल बेंजामिन आदिवासी भाषाओं के डिजिटलीकरण पर काम करेंगे.समस्त देशवासियों को आदिवासी दिवस की मुबारकबाद देते हुए स्वास्थ मंत्री इरफान अंसारी ने इसे आदिवासी समुदाय के लिए एक बड़ा सम्मान बताया है,पूरे समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश बताया है.
मंत्री लिखते हैं ”आदिवासी दिवस पर झारखंड के आदिवासी महिलाओं को UNESCO की टीम में शामिल करना वास्तव में एक गर्व की बात है और यह आदिवासी समुदाय के लिए एक बड़ा सम्मान है।UNESCO की यह पहल आदिवासी महिलाओं को सशक्त बनाने और उनकी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। आदिवासी महिलाओं की भागीदारी से न केवल उनके समुदाय को लाभ होगा, बल्कि यह पूरे समाज के लिए भी एक सकारात्मक संदेश होगा।मैंने अपना जीवन बचपन सब आदिवासी समाज के साथ बिताया है।आदिवासी समुदाय के प्रति बहुत सम्मान और प्रेम रखते हैं और उनकी सशक्तिकरण हमेशा मजबूत करने का काम किया है।मैं अपनी और से UNESCO को झारखंड की आदिवासी बहनों को सम्मान देने के लिए संगठनों की पहल की सराहना करते हैं।समस्त देशवासियों को आदिवासी दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं बधाई और मुबारकबाद”




