झारखंड के पांच IAS सहित 23 अफसरों पर ‘सोलर घोटाला’ मामले में कार्रवाई की तैयारी

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सोलर घोटाले में निगरानी ब्यूरो 5 आईएएस अफसरों समेत झारखंड के 23 अफसरों पर बड़ी कार्रवाई के लिए कमर कस रही है।उनमें निम्नलिखित अधिकारियों के नाम शामिल हैं:

  • आईएएस अधिकारी : वंदना दादेल, के. रवि कुमार, मस्तराम मीणा, प्रशांत कुमार और दीप्रवा लकड़ा।
  • अन्य अधिकारी: कृष्ण कुमार दास और उपेंद्र उरांव, शशि रंजन प्रसाद सिंह।
  • क्रय समिति सदस्य: नरेंद्र कुमार मिश्रा, पवन कुमार, शशिभूषण मेहता, भेदे मुंडा, विश्वनाथ राठौर, कुलदेव मंडल, महेंद्र प्रसाद, राजेंद्र प्रसाद रूंगटा, नोहिन किन्हो, मस्त राम मीणा, सुरेंद्र प्रसाद मंदिल्यार, बिंदेश्वरी दास, श्यामलाल साह, मिथिलेश कुमार, राजेश कुमार सिंह, सुरेश यादव।

एंटी करप्शन ब्यूरो ने 2015 में ही इस घोटाले की अंतिम रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें इन अफसरों पर विभागीय कार्यवाही की सिफारिश की गयी थी।

मामला झारखंड में सोलर लाइट की खरीदारी में बड़े पैमाने पर किये गये घोटाले का है। इस घोटाले में सस्ती दर पर मिलने वाली सोलर लाइट को महंगी दर पर खरीद कर गोदाम में सड़ा दिया गया। मामला दस साल पुराना है। जिस पर कार्रवाई करने के लिए एसीबी पहले ही रिपोर्ट सौंप चुकी है।

निगरानी ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार सोलर लाइट की खरीद में गड़बड़ी भी हुई है और अफसरों से प्रशासनिक चूक भी हुई है। मामला जब का है तब ये आईएएस अफसर चार जिलों गिरिडीह, देवघर, गोड्डा और दुमका में डीसी एवं डीडीसी जैसे पदों पर थे। सोलर लाइट की खरीदारी सांसद-विधायक स्थानीय फंड से हुई थी। गड़बड़ियां कई तरह से की गयीं, लेकिन तय दर से अधिक कीमत पर खरीदारी कर बड़ी गड़बड़ी की गयी। इस खरीदारी के लिए नियमों को ताक पर रखकर एजेंसियों को भुगतान किया गया।

जो लाइट डीजीएस/डी दर पर 25,651 रुपये से लेकर 29094 रुपये में खरीदी जा सकती थी, उसे खुली निविदा के माध्यम से 37,000 से 38,000 रुपये की दर से खरीदा गया। क्रय समिति के सदस्यों ने वित्तीय नियमावली को ताक पर रखकर खुली निविदा के माध्यम से सोलर लाइट क्रय करने का निर्णय लिया। बाद में खरीदे गये उपकरणों में त्रुटियां निकलीं, इसके बाद सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण गोदामों में पड़े-पड़े खराब हो गये। एसीबी ने इसे तत्कालीन डीसी की स्वेच्छारिता का मामला बताया है।

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