आगामी 12 मार्च (रविवार) को होने वाली सरना धर्म कोड महारैली को लेकर शुक्रवार को राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा अभियान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया।आयोजकों के अनुसार इस महारैली में कई राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी आदिवासी समाज के लोग शामिल होंगे।इसमें पांच लाख से अधिक सरना धर्मावलंबी अपने संसाधन से शामिल होंगे।इस महारैली में देश के विभिन्न राज्यों सहित नेपाल, भूटान, बांग्लादेश इत्यादि देशों के सरना धर्मावलंबी भी हिस्सा लेंगे। जनगणना परिपत्र में सरना धर्म कोड शामिल करना महारैली की मुख्य मांग है। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में धर्मगुरु बंधन तिग्गा ने कहा कि सरना धर्म कोड की मांग वर्षों से की जा रही है लेकिन केंद्र सरकार ने अभी तक अपना फैसला नही सुनाया है। इसलिए महारैली के माध्यम से विश्व भर के आदिवासियों को पहचान दिलाने के लिए रैली बुलायी गयी है। उन्होंने कहा कि भारत में छह धर्मों के लोगों का अलग धर्म कोड है। इनमें बौद्ध, जैन, ईसाई, हिंदू, मुस्लिम, सिख शामिल हैं, लेकिन आदिवासियों का अलग धर्म कोड नहीं है, जबकि आदिवासियों की जनसंख्या 17 करोड़ है। लेकिन इसकी जनसंख्या धीरे- धीरे कम हो रही है तथा संस्कृति विलुप्त हो रही है। उन्हें सांस्कृतिक पहचान दिलाने के लिए ही 12 मार्च को सरना धर्म कोड महारैली निकाली जाएगी।



