रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन ने राज्य में सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए JSSC और JPSC की पिछले कुछ वर्षों की सभी नियुक्तियों की CBI जांच कराने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ किया गया और सत्ता के संरक्षण में भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताएं हुईं।
चंपाई सोरेन ने कहा कि ब्लैकलिस्टेड एजेंसियों के माध्यम से सरकारी नौकरियों की भर्ती कराई गई, जबकि सत्ता पक्ष इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है। उन्होंने राज्य की CID की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि एजेंसी केवल छोटे लोगों पर कार्रवाई करती है और प्रभावशाली लोगों को बचाने का काम करती है।चंपाई सोरेन ने कहा,इस सरकार में सीआईडी का इतिहास देखें, तो पता चलेगा कि किसी भी मामले में उनकी एंट्री सिर्फ छोटी मछलियों को फंसाने एवं बड़े लोगों को बचाने के उद्देश्य से होती है। शराब घोटाला से लेकर ऐसे तमाम मामले इसी ओर इशारा करते हैं।
उन्होंने JSSC CGL परीक्षा का उल्लेख करते हुए कहा कि परीक्षा का सेकेंड टॉपर अब आरोपी है और उसके परिवार के कई सदस्यों को सरकारी नौकरी मिली है। ऐसे में परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस मामले में आवाज उठाने वाले छात्रों, शिक्षकों और व्हिसलब्लोअर्स को झूठे मामलों में फंसाया गया।
JPSC भर्ती प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए चंपाई सोरेन ने कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों के रिश्तेदार इंटरव्यू पैनल का हिस्सा बने, जिससे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब JPSC के तत्कालीन चेयरमैन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे और कई कर्मचारी गिरफ्तार हुए, तब राज्य सरकार की एजेंसियों से निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।
उत्पाद सिपाही भर्ती के दौरान अभ्यर्थियों की मौतों का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरकार की संवेदनशीलता पर भी सवाल उठाए और कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को संरक्षण नहीं बल्कि कठोर सजा मिलनी चाहिए।
चंपाई सोरेन ने मांग की कि झारखंड हाई कोर्ट इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए पिछले कुछ वर्षों में JSSC और JPSC द्वारा कराई गई सभी भर्ती प्रक्रियाओं की CBI जांच का आदेश दे।


