भाजपा का कहना है कि लापता अंश और अंशिका को ढूंढने का पूरा क्रेडिट पुलिस ने खा लिया है। गुरूवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सह सांसद आदित्य साहू ने रामगढ़ के चितरपुर में लापता बच्चों को खोजने के लिए बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया।
मामले में बाबूलाल मरांडी ने की प्रेस कांफ्रेंस :
रांची के धुर्वा से लापता हुए दो बच्चों की सकुशल बरामदगी सामूहिक प्रयासों का परिणाम है- मीडिया बंधु,सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता, जिन्होने पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया ।इस पूरे अभियान का विशेष श्रेय रामगढ़ के बजरंग दल कार्यकर्ता सचिन प्रजापति, डब्लू साहु, सन्नी एवं उनकी पूरी टीम को जाता है। इस खोज अभियान के वास्तविक नायक बजरंग दल के जमीनी कार्यकर्ता ही रहे।
इसलिए घोषित 4 लाख रुपये के इनाम की राशि पर पुलिसकर्मियों द्वारा ‘बंदरबांट’ नहीं होनी चाहिए। अगर यह पैसा किसी पुलिस वाले को दिया गया तो भाजपा इसका पुरजोर विरोध करेगी। इस राशि के असली हकदार सचिन प्रजापति, डबलु साहु, सन्नी हैं।
राजधानी रांची में बाल संरक्षण समिति (CWC) के अध्यक्ष का पद दो साल से खाली है। कल जब बच्चे मिले, तो औपचारिकता पूरा करने के लिए लोहरदगा से प्रभारियों को बुलाना पड़ा, तब जाकर शाम 7 बजे बच्चों की पेशी हो पाई। यह सरकार की संवेदनशीलता की पोल खोलता है।
बच्चों के मिलने के बाद हटिया डीएसपी का पटाखे फोड़कर जश्न मनाना हास्यास्पद है। आखिर जश्न किस बात का? अपनी नाकामी का?राज्य के डीजीपी ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट (JJ Act), 2015 की धारा 74 का खुलेआम उल्लंघन किया है। कानूनन, बच्चों के मिलने के बाद उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) या काउंसलर के पास ले जाना चाहिए था, ताकि यह तय हो सके कि बच्चा कहाँ जाएगा। लेकिन डीजीपी ने अपनी वाहवाही लूटने के लिए डरे-सहमे बच्चों को वर्दीधारियों के बीच प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के सामने पेश कर दिया।जिस डीजीपी को बच्चों की निजता के मौलिक कानून का ज्ञान नहीं, वो राज्य क्या चलाएंगे?




