JSSC CGL पेपर लीक मामले पर मरांडी : जो काम पूर्व DGP अनुराग गुप्ता नहीं कर पाए, सीएम योगी ने कर दिया

0
marandi

झारखंड में हुए JSSC CGL पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी विनय साह उर्फ हरिहर सिंह आखिरकार पकड़ा गया। उत्तर प्रदेश STF ने उसे गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र स्थित हनुमंत नगर कॉलोनी से दबोच लिया। 22 सितंबर 2024 की परीक्षा में पेपर लीक कराने के बाद से वह फरार चल रहा था। उसकी गिरफ्तारी झारखंड पुलिस द्वारा की गई आधिकारिक अनुरोध के आधार पर की गई।

भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने मामले पर कहा, ” JSSC CGL पेपर लीक मामले में विनय साह की गिरफ्तारी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।जो काम झारखंड पुलिस, पूर्व DGP अनुराग गुप्ता और सरकार के दबाव में नहीं कर पाई, वह काम सीएम योगी आदित्य नाथ की यूपी पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने कर दिखाया।मेरा पहला सवाल यह है कि आखिर विनय साह की गिरफ्तारी हाई कोर्ट में चल रही सुनवाई के खत्म होने के बाद ही क्यों हुई? क्या हमारी राज्य पुलिस का खुफिया तंत्र इतना विफल है कि वह आरोपियों को एक साल से पकड़ नहीं पा रहा था?

इस मामले का मुख्य अभियुक्त अनीश अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हमें सूत्रों के हवाले से पक्की सूचना मिली है कि पूर्व DGP अनुराग गुप्ता ने एक मोटी रकम लेकर अनीश की गिरफ्तारी को अब तक टाले रखा है, ताकि पेपर लीक से संबंधित सारे डिजिटल साक्ष्यों को धीरे-धीरे नष्ट किया जा सके।हमारे पास यह भी पक्की सूचना है कि जिन छात्रों ने नेपाल, राँची, हजारीबाग, और राँची के मंत्री रेजिडेंसी, नियामतपुर व अन्य जगहों पर प्रश्नों के उत्तर रटे थे, राज्य की CID टीम उन सभी के स्वीकारोक्ति बयानों (Confession Statements) को सरकार और पूर्व DGP अनुराग गुप्ता के दबाव में बदल रही है, ताकि कुछ सफेदपोशों को बचाया जा सके।

एक गंभीर सवाल यह भी है कि आखिर ऐसी कौन सी मजबूरी थी कि पेपर लीक की जांच कर रही CID की पूरी टीम को जांच के दौरान दो बार बदला गया? जिस पर न्यायालय ने सख्त आपत्ति भी जताई थी।सवाल यह भी उठता है कि आज तक पेपर लीक में संबंधित एजेंसी और आयोग के अधिकारियों से पूछताछ क्यों नहीं की गई? जबकि आयोग के सदस्यों ने शुरुआत में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर छात्रों के सारे सबूतों को ‘एडिटेड’ (Edited) बताया था।

अगर ”आज तक” न्यूज़ की रिपोर्ट को देखा जाए, तो अभियुक्त विनय साह ने खुद स्वीकार किया है कि कैसे उसने परीक्षा से पहले रांची के एक होटल में रुककर इस पेपर लीक की साजिश रची और छात्रों को नेपाल ले जाकर प्रश्नों के उत्तर रटवाए।हमारे पास पुख्ता जानकारी है कि फरार अभियुक्त अनीश का सीधा संपर्क परीक्षा कराने वाली एजेंसी, आयोग के अधिकारियों और पूर्व DGP अनुराग गुप्ता से है।

एक अंतिम और गंभीर सवाल… आखिर ऐसी कौन सी बात है कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी का पूरा कुनबा इस पेपर लीक को मात्र धनउगाही बताने पर तुला हुआ है?मैं, राज्य के मुख्यमंत्री से अनुरोध करता हूँ कि अभी भी वक्त है, अगर आपकी मंशा स्पष्ट है तो तत्काल इस पूरे पेपर लीक प्रकरण की जांच CBI से कराई जाए। साथ ही, मैं राज्य की CID टीम और उनके डीजी से अनुरोध करूँगा कि इस पूरे मामले की जाँच बिना किसी भेदभाव के की जाए, क्योंकि याद रहे समय भी बदलता है और परिस्थितियां भी, अगर कुछ नहीं बदलता है तो वह है ‘सत्य’।हम झारखंड के युवाओं को विश्वास दिलाना चाहते हैं कि झारखण्ड भाजपा भ्रष्टाचार की इस लड़ाई में हमेशा आपके साथ खड़ी रहेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here