सहारनपुर: सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद एक मस्जिद को कथित तौर पर सुबह करीब 5 बजे गिराए जाने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश की BJP सरकार पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या मुसलमानों के लिए संविधान में दिया गया धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार अब भी सुरक्षित है।ओवैसी ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार मस्जिदों और अन्य इबादतगाहों पर “कमज़ोर और मनगढ़ंत वजहों” के नाम पर बुलडोज़र चला रही है। उन्होंने कहा कि सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद के संबंध में मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज़ पेश किए थे और यह दावा किया था कि कलेक्ट्रेट से पहले से ही वहां मस्जिद मौजूद थी।
‘एक सदी से ज्यादा समय से होती रही नमाज़’
ओवैसी के मुताबिक, संबंधित मस्जिद में एक सदी से भी अधिक समय से लगातार नमाज़ अदा की जाती रही है। उन्होंने इसे लंबे समय से इबादतगाह के रूप में इस्तेमाल की जा रही जगह बताते हुए ‘वक़्फ़ बाय यूज़र’ के कानूनी सिद्धांत का उल्लेख किया।उन्होंने Limitation Act और लंबे समय से चले आ रहे कब्जे का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी जमीन पर सरकार की जानकारी में दशकों तक खुला और लगातार कब्जा रहा हो, तो उसे अचानक सरकारी जमीन बताने का सवाल उठता है। ओवैसी ने इसी संदर्भ में adverse possession के कानूनी पहलू पर भी सवाल उठाया।
‘मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में’
AIMIM प्रमुख ने अपने बयान में कहा, “मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।” उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को मस्जिद दिखाई देने से परेशानी होती है, लेकिन इसका खामियाजा मुस्लिम समुदाय की इबादतगाह को नहीं भुगतना चाहिए।ओवैसी ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता किसी सरकार की कृपा पर निर्भर नहीं है। उन्होंने अपने बयान के अंत में कहा, “मेरी मज़हबी आज़ादी आपकी रहम-ओ-करम पर मुबनी नहीं है।”




