आज भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन पर आदिवासियों के नाम को मिट्टी में मिलाने का आरोप लगाया है. मरांडी ने ट्वीट कर कहा जमीन घोटाले में ईडी के सामने हेमंत सोरेन के सारे हथकंडे विफल होते जा रहे हैं तो ऐसे में सिर्फ एक ही रास्ता नज़र आ रहा है आदिवासी होने का ‘विक्टिम कार्ड’… हेमंत सोरेन जी, सच्चा आदिवासी कभी भी गलत रस्तों पर नहीं चलता l आपने तो अपनी काली करतूतों से हम आदिवासियों के नाम को मिट्टी में मिलाने का काम किया है। आपने और आपके परिवार ने महज कुछ पैसों के लिए झारखंड आंदोलन को बेच दिया, रांची से लेकर संथाल परगना तक आदिवासियों की सैकड़ों एकड़ जमीनें हड़प लीं…आपके परिवार ने सिर्फ़ निजी लाभ के लिए दशकों से सबसे ज़्यादा उन्हीं आदिवासियों का शोषण किया है, उनकी ज़मीन लूट ली है, जिन्होंने आपसबों पर भरोसा कर सर-आँखों पर बिठाया और फ़र्श से अर्श पर पंहुचाया। जब साहिबगंज में आदिवासी बेटी के शरीर के टुकड़े टुकड़े कर दिए गए, सैकड़ों आदिवासी महिलाओं के दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध हुए…तब कहाँ चली गई थी आपकी ‘आदिवासियत’?जब पंकज मिश्रा, अमित अग्रवाल, प्रेम प्रकाश जैसे “लूट खतियानधारी”लोगों के साथ मिलकर झारखंड और झारखंड के आदिवासियों को लूट रहे थे.तब आदिवासी होने के ख़्याल क्यों नहीं आया आपको? ये फाइल(लाख) फ़ोल्डर(करोड़) और बॉस (मुख्यमंत्री) के आधुनिक आविष्कार पर चुप्पी क्यों? कुछ तो बोलिये। लूट संस्कृति की इन आधुनिक शब्दावली की पढ़ाई किस स्कूल से की थी आपने? याद रखिए, आपने भ्रष्टाचार के अनेकों कार्य किए हैं l देश की न्यायिक प्रणाली के सामने आपके पैंतरे काम नहीं आएंगे। वोट का मतलब लूट का लाइसेंस नहीं है। देर-सबेर आपको गंभीर परिणाम भुगतान ही होगा!



