झारखंड में भाकपा माओवादी संगठनों ने अब सीधे मुठभेड़ के बजाय पुलिस बलों को नुकसान पहुंचाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। जिसे कारण अब झारखंड पुलिस भी माओवादियों से निपटने के लिए अपनी रणनीति में बदलाव की योजना बनाने में जुट गई है। राज्य पुलिस मुख्यालय में चाईबासा की नक्सली वारदात को लेकर बैठक हुई।
इस बैठक में राज्य पुलिस के डीजीपी नीरज सिन्हा ने स्पेशल ब्रांच एडीजी मुरारीलाल मीणा, एडीजी अभियान नवीन कुमार सिंह व सीआरपीएफ के अधिकारी मौजूद थे। राज्य पुलिस के अधिकारियों को जानकारी मिली है कि भाकपा माओवादी चाईबासा समेत राज्य के अन्य हिस्सों में पुलिस बलों को टारगेट करने के लिए नई तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। चाईबासा के लांजी पहाड़ में हुए ब्लास्ट के दौरान क्लेमोर माइंस के इस्तेमाल की बात सामने आयी है। चाईबासा में पाइप में नए तरीके की आईईडी प्लांट की गई थी, वहीं लातेहार-गुमला के इलाके में प्रेशर बम के इस्तेमाल की बात सामने आ रही है। इससे पैदल चलने वाले पुलिस बलों को गंभीर रूप से जख्मी किया जा रहा।
अगर चाईबासा की ही बात करें तो बीते 15 दिनों में छह बार पुलिस को सीधे तौर पर टारगेट करने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस ने तब आईईडी बरामद कर हमले की साजिश को नाकाम कर दिया था। जानकारी के अनुसार , नक्सली अब सीधी मुठभेड़ के बजाय नई तकनीक की आईईडी, तीर बम, प्रेशर बम जैसी चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि खुद बचे रहकर पुलिस बलों को टारगेट किया जा सके। माओवादियों ने भी स्मॉल एक्शन टीम बनाई है, जो पुलिस की गतिविधियों पर नजर रख कर छोटी संख्या में मौजूदगी देख उन्हें टारगेट करती है।



