हजारीबाग में आज कुख्यात माओवादी अनिल भुईया उर्फ सरकार ने डीसी,हजारीबाग,एसपी,हजारीबाग,समादेष्टा,22 बटालियन,सीआरपीएफ के समक्ष झारखंड सरकार के आत्मसमर्पण ए्वं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकरपुलिस से लूटे गए एक 0.303 रायफल एवं 10 गोलियों के साथ आत्मसमर्पण किया है.अनिल भुईया के ऊपर हजारीबाग जिले में करीब 16 कांड दर्ज है. वर्ष 2017 में टीपीसी के 7 सदस्यों के हत्या में अनिल भुइया की मुख्य भूमिका रही है. आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत मिलने वाले सभी प्रकार के लाभ अनिल भुईया को नियमानुसार दिए जाएंगे.
हजारीबाग की उपायुक्त नैंसी सहाय ने इस पूरे मामले पर बताया कि सरकार के द्वारा जो योजना लायी है. उनके तहत इन्हें विभिन्न तरह की सुविधाएं प्रदान की जाएगी. वही अनिल को आत्मसमर्पण के लिए 50,000 कैश भी प्रदान किए जा रहे हैं. आगे इन्हें क्या पैकेज दिया जाएगा इस पर भी विचार किया जा रहा है. वहीं इस पूरे मामले पर पुलिस अधीक्षक मनोज रतन ने बताया कि उन्होंने पुलिस से लूटा हुआ एक राइफल को भी हजारीबाग पुलिस को वापस सौंपा है. वही सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत इन्हें 4 डिसमिल जमीन घर बनाने हेतु 3 लाख रुपये तक कैश, अगर इनकी बेटी है तो मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत आर्थिक सहयोग किया जाएगा. वहीं उन्होंने अन्य माओवादी संगठन से अपील की है कि आप सभी भी सरकार के इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करें नहीं तो आप या तो पुलिस के द्वारा पकड़े जाने पर जेल पे जाएंगे नहीं तो मुठभेड़ होने पर मारे जाएंगे. इससे अच्छा होगा कि आप मुख्यधारा में जुड़कर समाज के विकास में अपना सहयोग दें.
पुलिस के मुताबिक अनिल भुईयां ने वर्ष 2009 में माओवादी संगठन से जुड़ गए थे. पहले यह टीपीसी में हुआ करते थे जिसके बाद उन्होंने वहां के कुछ नक्सलियों को मार कर अपना नया संगठन की शुरुआत की. जिसका नाम जेजे एमपी रखा. पुलिस के द्वारा इस संगठन को हजारीबाग से खदेड़ने पर इन्होंने सीपीआई माऊिस्ट पार्टी को 2019 में ज्वाइन कर लिया. जहां तीन साल रहने के बाद इन्हें उनकी नीति पसंद नहीं आई. लेवी के पैसे माओवादी नेता अपने निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करते हैं और समाज के लिए इसका कोई उपयोग नहीं करते जिसको देखते हुए उन्होंने आज आत्मसमर्पण पुलिस के समक्ष कर दिया है.



