झारखण्ड : हजारीबाग के कजरी कॉटन से लेकर गोड्डा की तसर सिल्क साड़ियों तक, और लोहरदगा के पेशरार जैसे सुदूर प्रखंड में बनी दरी और रग्स — झारखण्ड की ग्रामीण महिलाएं सखी मंडलों के माध्यम से बुनाई की कला को आत्मनिर्भरता, परंपरा और सशक्तिकरण की नई कहानी में पिरो रही हैं।जेएसएलपीएस का ब्रांड ‘पलाश’ न केवल इन महिलाओं के उत्पादों को मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि उनकी उद्यमिता को नई उड़ान दे रहा है।
राज्य के विभिन्न जिलों में सखी मंडल की महिलाओं द्वारा पलाश एवं अदिवा ब्रांड के तहत हस्तनिर्मित राखी की बिक्री पलाश मार्ट एवं पलाश प्रदर्शनी सह बिक्री केंद्रों के माध्यम से जिला एवं प्रखंड स्तर पर की जा रही है। जिसमें, जैविक और पारंपरिक सामग्रियों के प्रयोग से बने राखी के साथ ही इस बार चांदी और ऑक्सीडाइज़्ड राखी भी खुबसूरत डिजाईन में खरीदादरी के लिए उपलब्ध है।
रांची के नगड़ी प्रखंड की मधुबाला देवी आदर्श महिला स्वयं श्रीधा समूह की सदस्य हैं। मधुबाला की आजीविका, खेती एवं पशुपालन पर निर्भर है। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें, टपक सिंचाई विधि के बारे में जानकारी मिली, जिसे अपनाकर उन्हें काफी फायदा हुआ। हाल ही में मुख्यमंत्री मंईयांसम्मान योजना के तहत मिली राशि से उन्होंने दो बकरी और सोनाली मुर्गियां खरीदी हैं। जिससे उनकी आय में और बढ़त होने की उम्मीद है। मधुबाला अपनी सफलता का श्रेय झारखण्ड सरकार और जेएसएलपीएस को देती हैं।



