Diwali 2020: इस गांव में आज भी जिंदा है मिट्टी के दीये बनाने की परंपरा

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Diwaliचकाचौंध भरी जिंदगी में पारंपरिक दियों का प्रयोग आज भी दीवाली को खास बनाता है। रांची से लगभग 10 किलोमीटर दूर बोड़ेया का सरपंच टोली एक ऐसा ही गांव है। यहां दर्जनों परिवार कई दशकों से मिट्टी के दीए बनाने का काम करते आ रहे हैं। हालांकि यह काम सालों भर होता है, लेकिन दिवाली का समय इनके लिए खास है।
दिवाली का समय आते ही पूरा परिवार मिट्टी के दीए बनाने में जुट जाता है। घर के मर्द दूर खेतों से मिट्टी लेकर आते हैं, उसे सानते हैं और उनसे विभिन्न प्रकार के दिए जाते हैं। वहीं घर की महिलाएं और बच्चे उन दिनों को सुखाने, रंगने और पकाने जैसे काम में मदद करते हैं। सरपंच टोली के सभी परिवारों के आय का एक मात्र साधन दीया बनाना ही है। इसके अलावा वे कोई और काम नहीं करते हैं। रमेश प्रजापति बताते हैं कि यह उनके पूर्वजों का पेशा है, जिसको उन्होंने जिंदा रखा है। यह चाहते हैं कि दिया बनाने की परंपरा कभी खत्म ना हो।
आमतौर पर बाजारों में एक दिए की कीमत 2 रुपए के आसपास होती है। लेकिन जहां इन दियों का निर्माण होता है, वहां ये 50 पैसे में खरीदे जाते है। यह दियों की थोक कीमत है, जिसमें लोगों को 1000 दियों के लिए ₹500 देने होते हैं। बाजार आते-आते ट्रांसपोर्ट और मार्जिन की वजह से इनकी कीमतें बढ़ जाती है। ranjana