रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड वन विभाग के कार्यों एवं प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को राज्य के वन क्षेत्रों का तकनीकी एवं डिजिटल रिकॉर्ड एक माह के भीतर तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि झारखंड की पहचान उसकी प्राकृतिक संपदा, वन्यजीवों और समृद्ध जैव विविधता से है। इनके संरक्षण और संवर्द्धन को राज्य सरकार सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के बाद से अब तक के सभी वन क्षेत्रों का समग्र तकनीकी एवं डिजिटल दस्तावेज तैयार किया जाए। उन्होंने ऐसी आधुनिक व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे एक क्लिक पर किसी भी वन क्षेत्र की स्थिति, स्वरूप, संरचना और वर्तमान परिस्थितियों की पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि वन प्रबंधन में सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकतम उपयोग किया जाए, ताकि वन क्षेत्रों की निगरानी, संरक्षण और विकास कार्यों को अधिक प्रभावी एवं पारदर्शी बनाया जा सके। उन्होंने वन संपदा और जैव विविधता के संरक्षण के लिए दीर्घकालिक एवं तकनीक आधारित कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया।




