नालसार के लॉ स्टूडेंट्स को लेकर BJP सांसद को बदलना पड़ा फैसला, अब हो रही इस्तीफे की मांग

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saurabh das

हैदराबाद: हैदराबाद स्थित NALSAR University of Law के 2026 बैच के छात्रों के एनरोलमेंट को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) का फैसला विवादों में घिर गया। 13 अगस्त को BCI ने अंतरिम आदेश जारी कर छात्रों के स्टेट बार काउंसिल में वकील के रूप में नामांकन पर रोक लगा दी थी।बताया गया कि विवाद की शुरुआत दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने के विरोध से हुई। BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद का सम्मान नहीं करने वाले छात्र जिम्मेदार अधिवक्ता नहीं बन सकते।

आदेश सामने आने के बाद छात्रों और अन्य कानूनी समुदाय की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई। CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर फैसले की आलोचना करते हुए राष्ट्रव्यापी विरोध की चेतावनी दी।घटनाक्रम के अनुसार, शाम 7:20 बजे BCI ने रोक का आदेश जारी किया और रात 8:45 बजे, यानी करीब 85 मिनट बाद, इसे वापस ले लिया गया।आदेश वापस लिए जाने के बाद NALSAR के 2026 बैच के छात्र अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल हो सकते हैं।

नालसार मामले में सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के यू-टर्न के बाद, सौरभ दास ने कहा है कि बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। दिल्ली के पूर्व सीएम अरविन्द केजरीवाल ने भी मनन कुमार के इस्तीफे की मांग की है.

भाजपा सांसद और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने नालसार यूनिवर्सिटी दीक्षांत समारोह विवाद पर सफाई देते हुए कहा, “…छात्र हित सर्वोपरि है। हमें सबसे पहले जो कानून पढ़ने वाले छात्रों के हितों की रक्षा करनी है, उनके हितों को देखना है… ऐसी स्थिति में कल एक आदेश(वकील पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्देश) जारी किया गया लेकिन तुरंत काउंसिल की बैठक हुई और कहा गया कि इस आदेश की अनुमति नहीं है। मंशा ये है कि किसी छात्र को ज्यूडिशरी इंटर्नशिप मिलने में कोई नुकसान ना हो। कभी-कभी ऐसा भी देखा गया है कि छात्रों को कुछ वजह से ज्यूडिशरी इंटर्नशिप में बाधा पहुंची है। पहले 1-1 सप्ताह तक छात्र सुप्रीम कोर्ट में इंटर्नशिप के लिए रहते थे लेकिन अब केवल 2 दिन के लिए रहते हैं। ये उचित नहीं था… इससे छात्र के हितों पर गलत असर पड़ेगा तो तुरंत उस आदेश को वापस ले लिया गया। कोई कार्रवाई नहीं होगी…”

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