रांची। झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के कथित बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के बीच यह बात तेजी से फैली कि मंत्री ने कहा है कि सरकार से बातचीत करने पहुंचे डेलिगेशन में वास्तविक अनशनकारी या आंदोलनरत छात्र शामिल नहीं थे।इस दावे के बाद JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच और छात्र नेता रविंद्र पासवान ने तीखी प्रतिक्रिया दी। छात्रों ने इसे अपने अपमान के रूप में लिया और सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि उनके एडमिट कार्ड की जांच कर यह देखा जा सकता है कि वे वास्तविक परीक्षार्थी और छात्र हैं या नहीं। छात्र संगठनों ने आंदोलनकारी युवाओं की पहचान पर सवाल उठाने को अनुचित बताया।
विवाद बढ़ने के बाद मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि सरकार से बातचीत करने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में आंदोलनकारी छात्र शामिल नहीं थे। मंत्री के मुताबिक, उनके बयान के संदर्भ को सोशल मीडिया पर तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उससे भ्रामक नैरेटिव तैयार किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र नेता रविंद्र पासवान उनकी बात की गंभीरता और चिंता को सही तरीके से नहीं समझ पाए।मंत्री ने कहा कि सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल कमेटी बनाई है और अब तक तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट की है, जिसमें JPSC को रद्द करने और वित्तीय मामलों की ED से जांच कराने जैसे मुद्दे शामिल हैं।
हालांकि, JPSC-CGL को रद्द करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के तहत हुई हैं। इसलिए सरकार को कानूनी प्रक्रिया के तहत ही आगे बढ़ना होगा। उन्होंने न्यायिक कमेटी से जांच और सलाह लेने की बात कही।मंत्री ने अनशनरत छात्रों से अनशन समाप्त कर स्वस्थ रहने की अपील करते हुए कहा कि सरकार को आगे की कार्रवाई के लिए समय दिया जाना चाहिए।




