Ranchi : मंगलवार को जमशेदपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि झारखंड सरकार राजनीतिक लाभ के लिए 77 फीसदी आरक्षण को लागू करना चाहती थी. जिसका बिल राजभवन भेजा गया था. ऐसे बिल को संवैधानिक तौर पर खारिज ही करना होगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने भी 77 फीसदी आरक्षण को गलत ठहरा दिया है. ऐसे में उस बिल को कैसे मंजूरी दी जा सकती है? इसी मुद्दे को विधानसभा में उठाते हुए विधायक प्रदीप यादव ने विधानसभा अध्यक्ष से आज सवाल किया कि महामहिम राज्यपाल ने 77 % आरक्षण बिल को असंवैधानिक बोलकर वापस करने की बात कही है, जबकि हमारे पड़ोसी राज्य बिहार में 75 % आरक्षण बिल पर वहां के राज्यपाल ने मोहर लगाकर उसे संवैधानिक बना दिया है…तो झारखण्ड के दलित, आदिवासी, पिछड़ों के साथ यह भेदभाव क्यों ? आखिर किसके इशारे पर ??



