जमाबंदी में हुई त्रुटियों के सुधार के लिए समय सीमा तय होगी। परिमार्जन पोर्टल पर काम की मंद गति को देख भूमि सुधार विभाग इस पर विचार कर रहा है। उम्मीद है इसके लिए 15 दिन का समय मिलेगा। इस अवधि में आवेदनों का निष्पादन नहीं करने वाले कर्मियों पर कार्रवाई होगी।
भूमि सुधार विभाग ने ऑनलाइन म्यूटेशन शुरू किया तो इसमें गलतियों की भरमार हो गई। पहले सरकार को लगा कि म्यूटेशन के लिए समय कम होने से हड़बड़ी के कारण भूल हो रही है। सरकार ने दाखिल-खारिज के ऑनलाइन आवेदन के निष्पादन की समय सीमा को बढ़ाकर 35 दिन कर दिया। पहले यह समय सीमा 18 दिन थी। आपत्ति की समय सीमा भी 60 दिन से बढ़ाकर 75 कार्यदिवस कर दिया गया। इसी के साथ ही सरकार ने परिमार्जन पोर्टल बनाकर इसमें त्रुटियों के सुधार के लिए ऑनलाइन आवेदन लेना शुरू किया। लेकिन इसकी गति इतनी धीमी है कि नवम्बर महीने तक आवेदनों के निपटाने का प्रतिशत मात्र 48 ही था। उस समय तक दो लाख 95 हजार से अधिक आवेदन भूल सुधार के लिए मिले थे, लेकिन केवल एक लाख 44 हजार आवेदनों का ही निपटारा हो सका है। जमाबंदी की व्यवस्था ऑनलाइन होने के बाद भी विभाग में ‘भ्रष्टाचार’ पर अंकुश नहीं लग सका। कई बार तो खाता या फिर किसानों के नाम ही गलत चढ़ा दिए जाते हैं। उसके बाद सुधार के लिए रैयतों या भूस्वामियों से ‘ठोस सबूत’ (नजायज वसूली) की मांग होने लगती है। अधिकारी भी इससे अवगत हैं। लिहाजा परिमार्जन पोर्टल के बाद भी कोई सुधार नहीं दिख रहा है। ‘व्यवस्था’ के तहत ‘ठोस सबूत’ के साथ आवेदन किए तो मामला एक हफ्ते का है, वरना दौड़ते रहिये महीनों। समय तय कर नई व्यवस्था हो पाएगी तो आवेदकों को राहत मिलने की उम्मीद है। ranjana



