रांची : झारखंड सरकार एक बार फिर राज्य में भवन नियमितीकरण बिल लेकर आई है। 15 अप्रैल को इसे कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। जल्दी ही अधिसूचना जारी होनेवाली है। यह वर्ष 2019 में बनी नियमावली का संशोधित प्रारूप है। जिसके तहत बिना नक्शा पास कराए या नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए भवनों को वैध बनाया जा रहा है। यह योजना राज्य के शहरी क्षेत्रों में बिना अनुमति के बने मकानों को वैध करने के लिए है।यह नियम केवल 31 दिसंबर 2019 से पूर्व निर्मित भवनों पर लागू होगा जिनकी ऊंचाई 10 मीटर तक है (यानी अधिकतम जी प्लस टू संरचना)।यह नीति 300 वर्ग मीटर तक के भूखंडों पर बने आवासीय और व्यावसायिक भवनों के लिए है।इस योजना से राज्य में लगभग सात लाख से अधिक परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके पास अपने घरों के वैध दस्तावेज नहीं थे। यह योजना अवैध निर्माण को वैध बनाकर उन्हें मालिकाना हक देगी।मालिकाना हक इससे उन लाखों लोगों को राहत मिलेगी जिनके पास घर तो है लेकिन बिना नक्शा पास हुए होने के कारण वे तकनीकी रूप से ‘अवैध’ श्रेणी में थे। अब उन्हें पूर्ण मालिकाना हक मिल सकेगा।जिन्होंने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करके मकान नहीं बनाए हैं।सीएनटी एक्ट (छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट) का उल्लंघन नहीं किया है। इस बिल से ऐसे लोगों को राहत देने की कोशिश की गई है, जिन्होंने वैध तरीक से जमीन खरीदकर मकान बनाए हैं, लेकिन किसी कारणवश नक्शा पास नहीं करा पाए हैं। ऐसे भवनों को कुछ शुल्क लेकर उसे नियमित कर दिया जाएगा।




