झारखंड में खतियान आधारित स्थानीय नीति की माँग ज़ोर पकड़ रही है. इस माँग को लेकर माटी का स्वाभिमान आंदोलन की शुरुआत की गयी है. इस आंदोलन के माध्यम से झारखंडी जनमानस के बीच जनजागरण किया जाएगा. साथ ही इस आंदोलन में लोगों की राय भी माँगी जा रही है. आंदोलन के संयोजक संजय मेहता ने इसे लेकर एक आह्वान पत्र जारी किया है. जिसमें निम्न बातें लिखी गयी है.
माटी का स्वाभिमान – झारखंड अपने निर्माण के दो दशक से ज़्यादा समय के दौर को पार कर चुका है. बावजूद इसके आज भी झारखंडी अवाम सड़कों पर है. यहाँ के छात्र-नौजवान अपने ही राज्य में एक अदद नौकरी पाने के लिए रोज़ लाठियाँ खा रहे हैं. सामान्य प्रतियोगी परीक्षाओं से लेकर JPSC की परीक्षा तक में अनियमितता की बात सामने आ रही है. परीक्षा, परिणाम, विवाद के चक्कर में छात्रों का समय और भविष्य बर्बाद हो रहा है. निजी क्षेत्र की नौकरियों में 75 प्रतिशत के आरक्षण की घोषणा पर कहीं कोई ठोस पहल दिखाई नहीं पड़ता. ओबीसी आरक्षण का मसला अब तक सुलझ नहीं पाया.



