हजारीबाग: हजारीबाग वनभूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और अनियमितता से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही उनके जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। इससे पहले 28 अप्रैल को झारखंड हाईकोर्ट ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत मंजूर करते हुए विनय कुमार चौबे पर कई शर्तें लगाई हैं। अदालत ने निर्देश दिया है कि वे देश छोड़कर नहीं जाएंगे, मामले से जुड़े किसी भी गवाह को प्रभावित करने या उनसे संपर्क करने का प्रयास नहीं करेंगे तथा जांच एजेंसियों को पूरा सहयोग देंगे।इसी मामले में अदालत ने विनय चौबे के करीबी माने जाने वाले विनय सिंह, उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह को भी जमानत प्रदान की है।
यह मामला वर्ष 2009-10 के दौरान विनय कुमार चौबे के हजारीबाग उपायुक्त (डीसी) के कार्यकाल से जुड़ा है। आरोप है कि उनके कार्यकाल में वनभूमि की कथित अवैध खरीद-बिक्री और अन्य अनियमितताएं हुईं।विनय कुमार चौबे को नवंबर 2025 में इस मामले में गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। हजारीबाग वनभूमि घोटाला (कांड संख्या 11/2025) में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने कुल 73 लोगों को नामजद आरोपी बनाया है। इनमें विनय सिंह, स्निग्धा सिंह, हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद, तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) शैलेश कुमार, ब्रोकर विजय सिंह समेत अन्य शामिल हैं।
गौरतलब है कि ACB ने विनय कुमार चौबे को सबसे पहले 20 मई 2025 को कथित झारखंड शराब घोटाले में गिरफ्तार किया था। अगस्त 2025 में उन्हें उस मामले में ‘डिफॉल्ट बेल’ मिल गई थी। हालांकि, जेल से रिहा होने से पहले ही नवंबर 2025 में ACB ने उन्हें हजारीबाग वनभूमि मामले में रिमांड पर ले लिया, जिसके कारण वे लगातार न्यायिक हिरासत में बने रहे।


