सिमडेगा: झारखंड सरकार की ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की पहल अब जमीनी स्तर पर बदलाव की तस्वीर पेश कर रही है। बासजोर प्रखंड के कन्छुपानी गांव की श्रीमती हेमलता डूंगडूंग (पति—राजेन डूंगडूंग) की कहानी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक मिसाल है।कभी परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण हेमलता हड़िया-दारू बेचने का काम करती थीं। वहीं उनके पति धान कटाई और खेती-किसानी के कार्य से परिवार की आजीविका चलाने में सहयोग करते थे। पांच सदस्यों वाले परिवार के लिए सीमित आमदनी में घर चलाना काफी चुनौतीपूर्ण था।
स्वयं सहायता समूह से मिली नई राह
वर्ष 2020 में हेमलता झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (JSLPS) के अंतर्गत गठित ‘दिपा’ स्वयं सहायता समूह (SHG) से जुड़ीं। समूह की नियमित बैठकों में भाग लेने के दौरान नवजीवन सखी ने उन्हें हड़िया-दारू के सेवन और बिक्री से होने वाले सामाजिक एवं स्वास्थ्य संबंधी दुष्प्रभावों की जानकारी दी।समूह से मिले मार्गदर्शन और प्रेरणा ने हेमलता को अपनी आजीविका का विकल्प तलाशने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2025 में उन्होंने JSLPS, सिमडेगा द्वारा संचालित ‘फूलो झानो आशीर्वाद अभियान’ के तहत ग्राम संगठन (VO) में आवेदन किया और हड़िया-दारू के व्यवसाय को छोड़कर स्वरोजगार अपनाने का निर्णय लिया।
₹10 हजार की सहायता से शुरू किया जनरल स्टोर
जिला प्रशासन एवं JSLPS की पहल के तहत हेमलता को प्रारंभिक तौर पर ₹10,000 की ब्याजमुक्त सहायता राशि उपलब्ध कराई गई। इसी राशि से उन्होंने गांव में एक छोटी सी जनरल स्टोर की दुकान शुरू की।इसके बाद उन्होंने स्वयं सहायता समूह से जुड़े रहकर अपने व्यवसाय को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। जरूरत के अनुसार समूह से छोटी-छोटी ऋण राशि लेकर उन्होंने दुकान में नए सामान जोड़े और कारोबार का विस्तार किया।
आज प्रतिमाह करीब ₹10 हजार की आय
हेमलता की मेहनत और लगन का परिणाम यह है कि कभी छोटी सी दुकान से शुरू हुआ उनका कारोबार आज एक बड़े स्टोर का रूप ले चुका है। वर्तमान में वे प्रतिदिन औसतन ₹400 से ₹500 तक की बिक्री कर रही हैं। इससे उन्हें प्रतिमाह लगभग ₹10,000 की आय हो रही है।
हेमलता की यह यात्रा बताती है कि सही मार्गदर्शन, सामूहिक सहयोग और सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपनी आजीविका में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
हड़िया-दारू के कारोबार को छोड़कर सम्मानजनक स्वरोजगार की राह चुनने वाली हेमलता आज अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। स्वयं सहायता समूह से जुड़ाव ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया, बल्कि अपने भविष्य को लेकर आत्मविश्वास भी दिया।




