रांची: झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय अध्यक्ष एवं डुमरी विधायक जयराम कुमार महतो ने खान और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने विधेयक पर पुनर्विचार करते हुए इसे वापस लेने तथा झारखंड में खनिज सेस जारी रखने की मांग की है।जयराम महतो ने कहा कि देश को लगभग 40% खनिज उपलब्ध कराने वाले झारखंड को खनिज सेस से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। झारखंड के रैयतों ने खनन परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर अपनी जमीन दी है। इसके बदले उन्हें विस्थापन, पलायन और प्रदूषण का दंश झेलना पड़ रहा है।ऐसे में खनिज संसाधनों से मिलने वाले राजस्व पर राज्य का अधिकार और उसकी विकास संबंधी जरूरतें और भी महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
पत्र में रॉयल्टी और सेस को लेकर केंद्र और राज्य के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध का भी उल्लेख किया गया है।महतो ने दावा किया कि The Jharkhand Mineral Bearing Land Cess Rules, 2024 के तहत खनिज-धारित भूमि पर मुख्य रूप से कोयला और लौह अयस्क से सेस प्राप्त होता है। उन्होंने आशंका जताई कि प्रस्तावित संशोधन के लागू होने से राज्य को मिलने वाले सेस पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिसका असर राज्य की वित्तीय स्थिति और जनकल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि झारखंड के हितों और समेकित विकास की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार को विधेयक पर पुनर्विचार करना चाहिए। जयराम महतो ने स्पष्ट किया कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो झारखंड के हक और अधिकार के लिए सड़क से सदन तक लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा।उन्होंने प्रधानमंत्री से झारखंड जैसे खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों की आर्थिक स्थिति, विकास की जरूरतों और जनता की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने की अपील की है।


