रांची बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद रांची में नक्सली आंदोलन से जुड़े एक बड़े नाम प्रशांत बोस (उर्फ किशन दा) का शुक्रवार सुबह निधन हो गया।उनकी मौत राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (रिम्स) में हुई।वे भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य थे।उम्र लगभग 75 वर्ष थी और वे लंबे समय से बीमार चल रहे थे।वे बिरसा मुंडा केंद्रीय जेल में बंद थे।मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले थे और संगठन में “किशन दा” व “मनीष उर्फ बूढ़ा” नाम से भी जाने जाते थे।रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सुबह करीब 4 बजे अंतिम सांस ली। बताया जाता है कि जेल में रहते हुए वे अपने समय का बड़ा हिस्सा गीता पढ़ने में बिताते थे।प्रशांत बोस माओवादी आंदोलन के शुरुआती कमांडरों में से एक थे और कई हिंसक घटनाओं में उनकी भूमिका बताई जाती है। 2021 में दीवाली के दिन हुए एक बड़े हमले में भी उनका नाम सामने आया था, जिसमें सुरक्षा बलों के 15 जवान मारे गए थे। जेल प्रशासन ने उनकी मौत के बाद शव को रिम्स भेज दिया है.बता दें कि प्रशांत बोस के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में कम से कम 100 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें से झारखंड में ही करीब 50 मामले दर्ज थे। उन पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया गया था।




