रांची: रांची के सांसद संजय सेठ ने शनिवार को रिम्स परिसर स्थित आश्रयगृह का निरीक्षण किया और वहां की व्यवस्थाओं पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि गरीब मरीजों और उनके परिजनों की सुविधा के उद्देश्य से बनाए गए आश्रयगृह की स्थिति राज्य सरकार की लापरवाही के कारण खराब हो गई है।
सांसद ने कहा कि इस आश्रयगृह का निर्माण उनकी पहल पर पावरग्रिड के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) फंड से कराया गया था, ताकि इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले गरीब मरीजों के परिजनों को सस्ती दर पर आवास और भोजन की सुविधा मिल सके। लेकिन वर्तमान स्थिति इस उद्देश्य के विपरीत दिखाई दे रही है।निरीक्षण के दौरान सांसद ने बताया कि आश्रयगृह की दोनों लिफ्टें खराब मिलीं, कॉरिडोर में पानी जमा था और कैंटीन में भोजन की कीमतें जरूरतमंद लोगों की पहुंच से बाहर हैं। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य यहां आने वाले लोगों को ₹10 में भोजन उपलब्ध कराना था, लेकिन वर्तमान व्यवस्था में अधिक कीमत वसूली जा रही है, जिससे यह आश्रयगृह की बजाय किसी व्यावसायिक प्रतिष्ठान जैसा प्रतीत होता है।संजय सेठ ने राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि रिम्स और स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी उनके पास है, लेकिन गरीब मरीजों और उनके परिजनों को मिलने वाली सुविधाओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य व्यवस्था में गंभीर खामियां होने के बावजूद इस दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
सांसद ने स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया कि राजनीतिक मुद्दों से पहले रिम्स की व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दें, ताकि यहां इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों और उनके परिजनों को सम्मानजनक वातावरण, सस्ती आवास सुविधा और किफायती भोजन उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने कहा कि जनसेवा के लिए स्थापित संस्थानों का उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि मानव सेवा होना चाहिए।




