जहाँ पूरी दुनिया कोरोना नाम के महामारी से जूझ रही है और किसी देश में भी कोरोना को न किसी मज़हब से जोड़ा और न ही किसी ने किसी के साथ भी भेद भाव किया। सभी ने मिलजुल कर इससे लड़ने की कोशिश की वही दूसरी और भारत जो की एकता की प्रतिक मानी जाती है वहाँ पर मुस्लिम समाज के प्रति नफ़रत लगातार बढ़ रही है। यही नहीं स्वास्थ्य सुविधाओं में भी कही-कही उनके साथ भेद भाव हो रहा है ।
गुजरात के विकास मॉडल के अनुसार ऐसा ही कुछ लिखा है जिसे लगातार दो बार लोकतांत्रिक ढंग से चुना गया है ।
अहमदाबाद की बात करे तो वहाँ पर कोरोना के इलाज के लिए बनाए गए अहमदाबाद सिविल हॉस्पिटल में मुस्लिम और ग़ैर-मुस्लिम समाज के लिए अलग-अलग वार्ड बनाए गए है । इस खबर की पुष्टि हॉस्पिटल के कर्मचारियों ने तो कि लेकिन राज्य सरकार ने इससे इनकार करते हुए मामले की जांच का आश्वासन दिया है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में वालेंटिस कैन्सर हॉस्पिटल ने 11 बिंदुओं वाला एक इस्तहार छपवाया है जिसमें लिखा गया है कि उनके हॉस्पिटल में अगर कोई मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति इलाज करवाना चाहता है तो उसे पहले कोरोना का जांच बाहर से करवानी पड़ेगी । भरतपुर, राजस्थान के सरकारी हॉस्पिटल और झारखंड के जमशेदपुर हॉस्पिटल से भी मुस्लिम समुदाय के लोगों के साथ इस तरह की स्वास्थ्य सुविधाओं में भेदभाव की खबरें आ रही हैं।
सभी को पता होना चाहिए की किसी भी बीमारी का कोई भी धर्म नहीं होता। कुछ गलत लोगो के करनी के वजह से पुरे समुदाय को गलत समझना नहीं चाहिए और न ही निर्दोष लोगों का उत्पीड़न करना चाहिए ।



