Jharkhand Governor want to cancel Tribal Advisory Council
बीजेपी शासित कई राज्यों के TAC झारखंड सरकार ने अपनाया। फिर वो सही और यह गलत कैसे?
जनजातीय मामलो के मंत्री श्री अर्जुन मुंडा ने लोकसभा के दौरान एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा था कि अनुच्छेद 4 के प्रावधानों के अनुसार, भारत के संविधान की पांचवीं अनुसूची के अनुच्छेद 244 (1) के तहत, अनुसूचित क्षेत्रों वाले प्रत्येक राज्य में जनजाति सलाहकार परिषद (टीएसी) की स्थापना की जाएगी और, यदि राष्ट्रपति ऐसा निर्देश देते हैं, तो इसमें भी किसी भी राज्य में अनुसूचित जनजातियाँ हैं लेकिन अनुसूचित क्षेत्र नहीं हैं। जनजाति सलाहकार परिषद में 20 से अधिक सदस्य नहीं होंगे, जिनमें से लगभग, जैसा कि हो सकता है, तीन-चौथाई राज्य विधान सभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधि होंगे, बशर्ते कि राज्य विधानसभा में अनुसूचित जनजातियों के प्रतिनिधियों की संख्या सीटों की संख्या से कम हो ऐसे प्रतिनिधियों द्वारा भरी जाने वाली टीएसी में शेष सीटें उन जनजातियों के अन्य सदस्यों द्वारा भरी जाएंगी।
तदनुसार, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान जैसे अनुसूचित क्षेत्रों वाले 10 (दस) राज्यों में जनजाति सलाहकार परिषद (टीएसी) का गठन किया गया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तराखंड राज्यों में कोई अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र नहीं होने के कारण भी वहां जनजाति सलाहकार परिषद का गठन किया गया है। तदनुसार, ऐसा कोई राज्य नहीं है (टीएसी स्थापित करने के लिए अनिवार्य), जिसने टीएसी का गठन नहीं किया है। संविधान के अनुच्छेद 4, भाग बी, उप-अनुच्छेद (2) के प्रावधान में प्रावधान है कि राज्य में अनुसूचित जनजातियों के कल्याण और उन्नति से संबंधित ऐसे मामलों पर सलाह देना जनजाति सलाहकार परिषद का कर्तव्य होगा। राज्यपाल द्वारा उन्हें भेजा जा सकता है।
अब राज्यपाल क्यों झारखंड के TAC को करना चाहते है रद्द ?
झारखंड सरकार द्वारा बनाई गई टीएसी नियमावली को असंवैधानिक बताते हुए रेड करने की तैयारी राज्यपाल कर रहे है , राज्यपाल ने इस मामले में अटॉर्नी जनरल सहित सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता शुभाशीष रसिक सोरेन से सलाह ली है ओर अगर राज्यपाल tac को रद्द करते है तो 2021 के बाद बैठकों में लिए गए सारे निर्णय भी रद्द कर दिए जायेंगे I राज्य में tac के गठन में राज्यपाल द्वारा सुझाए गए निर्देशों का पालन नहीं करने की बात सामने आ रही है I
बीजेपी शासित राज्यो के कानून और नियमावली झारखंड में कैसे हो जाते है निराधार ?
जब यही कानून बीजेपी शासित राज्यो में प्रभावशाली है ओर कई ऐसे राज्य भी है जब वहां बीजेपी के सरकार के दौरान TAC का गठन किया गया था जो आज तक प्रभावशाली है तो फिर झारखंड में क्या दिक्कत है आपको पहले भी इस लेख में बताया कि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान जैसे अनुसूचित क्षेत्रों वाले 10 (दस) राज्यों में जनजाति सलाहकार परिषद (टीएसी) का गठन किया गया है। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और उत्तराखंड राज्यों में कोई अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र नहीं होने के कारण भी वहां जनजाति सलाहकार परिषद का गठन किया गया है, फिर झारखंड में ये कौन सा खेल चल रहा है ? क्या इससे राज्य के आदिवासी (अनुसूचित जनजाति) के विकास में बाधा नही कह सकते ? क्या राज्य के आदिवासियों के हक ओर अधिकार के लिए राजभवन की कोई जिम्मेवारी नहीं बनती ?
Jharkhand Governor want to cancel Tribal Advisory Council
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