अभावों से आत्मनिर्भरता तक: जुवाना किस्कू बनीं ‘लखपति दीदी’

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lakhpati didi

पाकुड़ जिले के हिरणपुर प्रखंड अंतर्गत पीपलजोड़िया गांव की जुवाना किस्कू की दुलाड़ बाहा आजीविका सखी मंडल से जुड़ने के बाद जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह से ऋण लेकर सूकर पालन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में केवल दो सूकर से शुरू किया गया यह प्रयास आज 17–18 सूकरों तक पहुंच चुका है, साथ ही वह मुर्गी व बकरी पालन भी करती हैं।जनवरी माह के अंत में उन्होंने 12 सूकर के बच्चों को 7,000 रुपये प्रति दर से बेचकर 84,000 रुपये की आय अर्जित की। इसके अलावा मुर्गी पालन से 38,400 रुपये और बकरी पालन से 22,000 रुपये की आमदनी हुई। जिससे उनकी कुल आय लगभग 1,44,000 रुपये रही।आज जुवाना किस्कू की वार्षिक आय डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच गई है, जिससे वे अपने बच्चों की पढ़ाई और परिवार की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पा रही हैं।

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